बीजिंग/नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव को लेकर चीन ने आधिकारिक बयान जारी किया है। चीन ने दोनों देशों को संयम बरतने की सलाह दी है और कहा है कि मौजूदा स्थिति चिंता का विषय है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि वह तनाव को कम करने के प्रयासों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर कार्य करने को तैयार है।
चीन की ‘शांति’ की अपील
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने ताजा घटनाक्रमों पर चिंता जताते हुए कहा:
“भारत और पाकिस्तान दोनों ही हमारे पड़ोसी हैं, और यह रिश्ता स्थायी है। मौजूदा हालात चिंताजनक हैं। चीन हर प्रकार के आतंकवाद का विरोध करता है और सभी पक्षों से संयम बरतने तथा अंतरराष्ट्रीय कानून व संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन करने की अपील करता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि चीन हालात को और खराब होने से रोकने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाने को तैयार है।
तनाव की पृष्ठभूमि: पहलगाम हमला और भारत की जवाबी कार्रवाई
भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव की शुरुआत उस समय हुई जब पहलगाम में एक बड़ा आतंकी हमला हुआ, जिसकी साजिश पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों द्वारा रची गई मानी जा रही है। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पीओके के 9 आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक कर दी।
इस कार्रवाई में कई आतंकियों के साथ-साथ जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के करीबी रिश्तेदार भी मारे गए, जिससे पाकिस्तान में हलचल मच गई।
पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई और भारतीय सेना की सतर्कता
भारत की कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान ने
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ड्रोन और मिसाइल हमलों की शुरुआत की,
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एलओसी पर भारी गोलाबारी की,
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और कई भारतीय सीमावर्ती इलाकों में तनाव फैलाने की कोशिश की।
हालांकि भारतीय सेना पूरी तरह से तैयार है और हर हमले का सटीक जवाब दे रही है। कई पाकिस्तानी ड्रोन मार गिराए जा चुके हैं, और सीमा पर भारतीय सैनिक पूरी सतर्कता से डटे हुए हैं।
आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान की बेबसी
भारत के सख्त रुख से जहां पाकिस्तान को सामरिक क्षति हुई, वहीं आर्थिक मोर्चे पर भी हालात खराब हैं। पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार लगा रहा है और वित्तीय सहायता के लिए दुनिया भर में अपीलें कर रहा है।
हाल ही में सामने आई सोशल मीडिया पोस्ट से संकेत मिला कि पाकिस्तान ने विश्व बैंक सहित अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से लोन मांगा, हालांकि बाद में उसे ‘हैकिंग की घटना’ बता कर दबाने की कोशिश की गई।
निष्कर्ष:
भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर चीन का बयान भले ही ‘तटस्थता’ दिखाता हो, लेकिन उसके शब्दों में छिपी कूटनीति साफ बताती है कि वह किसी एक पक्ष के साथ खुलकर नहीं आना चाहता। जहां भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आक्रामक रुख अपना रहा है, वहीं पाकिस्तान अब न सिर्फ सैन्य बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी पीछे हटता दिखाई दे रहा है।
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