ईरान-इजरायल युद्ध के बीच नई दिल्ली में ईरानी दूतावास ने शुक्रवार (20 जून 2025) को प्रेस वार्ता आयोजित की। इस दौरान डिप्टी चीफ ऑफ मिशन मोहम्मद जावेद हुसैनी ने कई तीखे बयान दिए — जिनमें भारत से समर्थन की अपेक्षा, इजरायल के खिलाफ आक्रोश और अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी शामिल थी।
“हम पर किया गया हमला बेबुनियाद था”
हुसैनी ने दावा किया कि ईरान पर बिना किसी कारण हमला किया गया और अब इस संघर्ष में निर्दोष नागरिकों की जान जा रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी मीडिया पूरी तस्वीर नहीं दिखा रहा और दुनिया को यह समझना चाहिए कि अगर पहले ही फिलिस्तीन में हो रहे हमलों को रोका गया होता, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।
“यह समय है जब दुनिया को एकजुट होकर इस हमले की खुली आलोचना करनी चाहिए,” – हुसैनी।
“हम भारत के साथ खड़े हैं, भारत भी बोले”
ईरानी उप-राजदूत ने भारत की भूमिका की सराहना की और कहा कि ईरान भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव मदद कर रहा है। उन्होंने साथ ही भारत से आग्रह किया कि वह इस हमले की निंदा करे।
“अगर भारत जैसे राष्ट्र सार्वजनिक रूप से इसकी आलोचना करेंगे, तो अन्य देश भी आगे आएंगे। यही इजरायल को रोकने का रास्ता है।”
अमेरिका को तीखी चेतावनी: “हम पर भरोसा नहीं”
हुसैनी ने अमेरिका को तीखे शब्दों में लताड़ते हुए कहा कि वॉशिंगटन इस संघर्ष में पक्षपाती भूमिका निभा रहा है और इजरायल की आक्रामकता को बढ़ावा दे रहा है।
“अमेरिका को कोई अधिकार नहीं कि वह डेडलाइन तय करे या धमकी दे। हम उस पर भरोसा नहीं करते, और हमारे पास कुछ ‘अनघोषित शक्तियां’ हैं जिन्हें समय आने पर इस्तेमाल किया जाएगा।”
“हम इजरायल को मान्यता नहीं देते”
ईरानी उप-राजनयिक ने दो टूक कहा कि तेहरान कभी भी इजरायल को मान्यता नहीं देगा, और उसके साथ किसी भी शांति वार्ता की संभावना नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि रूस और चीन जैसे देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईरान इजरायल के साथ किसी मेज़ पर नहीं बैठेगा।
“परमाणु हथियारों पर कौन सच्चा?”
हुसैनी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सवाल पूछा कि ईरान के पास एक भी परमाणु बम नहीं है, जबकि इजरायल के पास 75 से 400 तक परमाणु हथियार होने की जानकारी सार्वजनिक रूप से मौजूद है।
“हमने कभी किसी देश पर पहला हमला नहीं किया। इजरायल पहले ही पांच देशों पर सैन्य हमले कर चुका है,” उन्होंने जोड़ा।
ईरानी परमाणु कार्यक्रम को हुआ नुकसान
प्रेस वार्ता के अंत में हुसैनी ने यह स्वीकार किया कि इजरायली हमलों के कारण ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कुछ नुकसान जरूर हुआ है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह नुकसान कितना गहरा है, लेकिन संकेत दिया कि ईरान इसकी भरपाई करने में सक्षम है।
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