पाकिस्तान ने हाल ही में अपने सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को देश के सर्वोच्च सैन्य पद, फील्ड मार्शल के रूप में पदोन्नत किया है। यह पद उन्हें पाकिस्तान के इतिहास में इस रैंक तक पहुंचने वाले दूसरे सैन्य अधिकारी बना देता है। लेकिन इस पदोन्नति के साथ ही पाकिस्तान की ओर से भारत को एक बार फिर से युद्ध की धमकी दी गई है।
पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा DGISPR ने एक बयान में कहा, “भारत आग से खेल रहा है। अगर हालात बने तो हम युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हैं।” यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रहा है और जनरल मुनीर की यह पदोन्नति कई सवाल खड़े कर रही है।
फील्ड मार्शल बनते ही सियासी तूफान
पाक प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की कैबिनेट ने इस फैसले को हरी झंडी दी है, लेकिन देश के भीतर इस पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई और उसके समर्थकों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि मुनीर का यह प्रमोशन सत्ता पर स्थायी पकड़ बनाने की रणनीति है, क्योंकि फील्ड मार्शल का पद स्थायी होता है और इससे रिटायरमेंट की बाध्यता खत्म हो जाती है।
विरोध के सुर: क्या इतिहास खुद को दोहरा रहा है?
इस फैसले की तुलना अब पाकिस्तान के पहले फील्ड मार्शल अयूब खान से की जा रही है, जिन पर तानाशाही के आरोप लगे थे। आलोचकों का मानना है कि यह कदम सेना में जनरल मुनीर के प्रभाव को और बढ़ाने तथा राजनीतिक संतुलन को उनके पक्ष में करने की कोशिश है। वरिष्ठ पत्रकार वकार मलिक ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “फील्ड मार्शल का पद महज एक प्रतीकात्मक सम्मान होता है, इसकी कोई ऑपरेशनल अहमियत नहीं होती।“
क्या है भारत के लिए संदेश?
पाकिस्तान की तरफ से बार-बार दी जा रही युद्ध की धमकियों को भारत ने अब तक संयम और सतर्कता से लिया है। लेकिन बार-बार इस तरह की बयानबाज़ी को विश्लेषक पाकिस्तान की आंतरिक चुनौतियों से ध्यान भटकाने की एक कोशिश मानते हैं।
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