महाराष्ट्र के भिवंडी महानगरपालिका चुनाव के बाद अब मेयर पद को लेकर राजनीति तेज हो गई है। चुनाव भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने साथ मिलकर लड़ा था, लेकिन अब दोनों पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतरती दिख रही हैं।
क्या है सीटों का गणित?
भिवंडी महानगरपालिका में कुल 90 सीटें हैं। चुनाव परिणाम इस प्रकार रहे:
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कांग्रेस – 30 सीट
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भाजपा – 22 सीट
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शिवसेना (शिंदे गुट) – 12 सीट
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एनसीपी (शरद पवार गुट) – 12 सीट
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समाजवादी पार्टी – 6 सीट
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कोणार्क विकास पार्टी (केवीपी) – 4 सीट
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निर्दलीय – 1 सीट
भाजपा और शिवसेना मिलकर 34 सीटों तक पहुंचे, लेकिन बहुमत के लिए 46 सीटों की जरूरत है। यानी अभी भी आंकड़ा पूरा नहीं है।
केवीपी की बनी अहम भूमिका
मेयर पद के लिए जोड़तोड़ शुरू हो गई है। शिवसेना ने कोणार्क विकास पार्टी (केवीपी) के साथ मिलकर सत्ता पाने की रणनीति बनाई। केवीपी के पास सिर्फ 4 सीटें हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति में वही “किंगमेकर” बन सकती है।
विलास पाटिल की गिरफ्तारी से बदला माहौल
केवीपी प्रमुख और पूर्व मेयर विलास रघुनाथ पाटिल को आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने कथित धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया है। उन पर लोगों को घर दिलाने के नाम पर ठगी का आरोप है।
गिरफ्तारी के बाद माना जा रहा था कि शिवसेना की रणनीति कमजोर हो सकती है, लेकिन खबर है कि पुलिस सुरक्षा में ही वे मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। इससे सियासी माहौल और गरमा गया है।
भाजपा और शिवसेना दोनों ने ठोकी दावेदारी
पहले भाजपा ने मेयर पद के लिए चुनाव लड़ने का ऐलान किया। इसके बाद शिवसेना ने भी साफ कर दिया कि वह मेयर और उप-मेयर दोनों पदों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। इससे दोनों सहयोगी दलों के बीच दरार साफ दिखाई दे रही है।
20 फरवरी को होगा फैसला
16 फरवरी को नामांकन दाखिल हुए हैं और 20 फरवरी को मेयर पद का चुनाव होगा। किसी भी पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है, इसलिए आखिरी समय तक जोड़तोड़ चलने की संभावना है।
फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि मेयर की कुर्सी किसके पास जाएगी। लेकिन इतना तय है कि भिवंडी में इस बार सत्ता का रास्ता किसी भी दल के लिए आसान नहीं है।
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