इंफाल, 8 जून 2025:
उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर में हालात एक बार फिर से तनावपूर्ण हो गए हैं। इंफाल के कुछ हिस्सों में शनिवार रात हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रशासन ने पांच ज़िलों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं, जबकि कई ज़िलों में धारा 163 लागू कर दी गई है। बिष्णुपुर ज़िले में कर्फ्यू भी लगाया गया है।
विरोध की वजह: संगठन प्रमुख की गिरफ्तारी
विरोध की शुरुआत उस वक्त हुई जब खबरें सामने आईं कि मैतेई समुदाय से जुड़े संगठन अरामबाई तेंगगोल के नेता कानन सिंह को हिरासत में लिया गया है। कानन की गिरफ्तारी के बाद इंफाल के क्वाकेइथेल और उरीपोक इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर टायर और फर्नीचर जलाए। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए इन इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं।
इंटरनेट सेवाएं पांच दिनों के लिए बंद
राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में 5 दिनों के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद रहेंगी। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए “घृणा फैलाने वाली सामग्री” वायरल होने की आशंका है, जिससे कानून व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
धारा 163 और कर्फ्यू की घोषणा
इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, थौबल और काकचिंग में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू की गई है। इस कानून के तहत 5 या अधिक लोगों के सार्वजनिक रूप से एकत्र होने और विरोध-प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
वहीं, बिष्णुपुर ज़िले में रात 11 बजे से अनिश्चितकालीन कर्फ्यू घोषित कर दिया गया है।
कौन हैं कानन सिंह?
सूत्रों के मुताबिक, कानन सिंह को सिंगजमेई थाने के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया और उन्हें एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) गुवाहाटी ले गई। उन पर पुलिस अधिकारी मोइरंगथेम अमित के घर पर हमले सहित कई गंभीर आरोप हैं। फरवरी 2024 में उन्हें एक सरकारी अधिकारी के अपहरण में भी संदिग्ध बताया गया था।
स्थानीय संगठनों की प्रतिक्रिया
अरामबाई तेंगगोल ने अपने नेता की गिरफ्तारी के विरोध में 10 दिन के बंद का आह्वान किया है।
इससे पहले, कुकी नेशनल आर्मी (KNA) के शीर्ष नेता कामगिंगथांग गंगटे की गिरफ्तारी पर भी कुकी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था।
पिछली हिंसा की पृष्ठभूमि
मणिपुर में जातीय हिंसा का सिलसिला मई 2023 में शुरू हुआ था, जब मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल करने को लेकर मणिपुर हाईकोर्ट के आदेश के बाद कुकी और मैतेई समुदायों के बीच संघर्ष भड़क उठा।
इस हिंसा में अब तक 250 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग आज भी राहत शिविरों में रह रहे हैं।
मुख्यमंत्री का इस्तीफ़ा और राष्ट्रपति शासन
लगातार बिगड़ती स्थिति के चलते मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को फरवरी 2025 में पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है। राज्य की स्थिरता को लेकर भाजपा और विपक्षी दलों के बीच टकराव भी गहराता गया है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पूछा, “क्या प्रधानमंत्री इस हालात में मणिपुर का दौरा करेंगे?” उन्होंने दावा किया कि राज्य में कानून-व्यवस्था बुरी तरह चरमरा चुकी है।
निष्कर्ष: संकट से कब उबरेगा मणिपुर?
लगभग दो वर्षों से चले आ रहे जातीय टकराव और प्रशासनिक अस्थिरता के बीच, मणिपुर एक बार फिर से अशांति के दलदल में फंसता नजर आ रहा है।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती यह है कि वे संवेदनशील इलाकों में स्थायी समाधान खोजें—ना कि बार-बार इमरजेंसी उपायों का सहारा लें।
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