मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित ककनमठ मंदिर अपनी अनोखी बनावट और रहस्यमयी कहानी के कारण लोगों को हैरान करता है। यह मंदिर करीब 100 फीट ऊंचा है और इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने में सीमेंट, चूना या मिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया गया है। मंदिर के बड़े-बड़े पत्थर एक-दूसरे पर संतुलित करके लगाए गए हैं, फिर भी यह करीब 1000 साल से मजबूती से खड़ा है।
ड्राई स्टोन मेसनरी तकनीक से बना मंदिर
ककनमठ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसे ड्राई स्टोन मेसनरी तकनीक से बनाया गया है। इस तकनीक में पत्थरों को बिना किसी मसाले के एक-दूसरे पर जमाया जाता है। मंदिर के पत्थरों के बीच खाली जगह भी दिखाई देती है, लेकिन फिर भी इसका संतुलन आज तक बना हुआ है।
भूतों द्वारा मंदिर बनाने की कहानी
स्थानीय लोगों के बीच एक दिलचस्प कहानी प्रचलित है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि इस मंदिर को भूतों और अदृश्य शक्तियों ने एक ही रात में बनाया था। कहा जाता है कि जैसे ही सुबह होने लगी, वे शक्तियां काम अधूरा छोड़कर चली गईं। इसलिए मंदिर का कुछ हिस्सा अधूरा और आसपास पत्थर बिखरे हुए दिखाई देते हैं।
राजा कीर्तिराज से जुड़ी कथा
एक और कथा के अनुसार यह मंदिर कच्छपघात वंश के राजा कीर्तिराज ने बनवाया था। कहा जाता है कि भगवान शिव ने राजा के सपने में आकर कहा था कि मंदिर एक रात में बन जाएगा, लेकिन शर्त थी कि कोई भी इंसान इसे बनते हुए नहीं देखेगा।
राजा ने लोगों को घर से बाहर न निकलने की चेतावनी दी, लेकिन एक बच्चे ने जिज्ञासा में खिड़की से बाहर देख लिया। जैसे ही निर्माण कर रही शक्तियों को यह पता चला, उन्होंने काम रोक दिया और मंदिर अधूरा रह गया।
वैज्ञानिकों और इतिहासकारों की राय
इतिहासकारों के अनुसार यह मंदिर 11वीं शताब्दी में राजा कीर्तिराज के समय बनाया गया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के मुताबिक, समय के साथ आए भूकंप और हमलों के कारण आसपास के कई मंदिर टूट गए। आज जो हिस्सा बचा है, वह मुख्य मंदिर और उसका शिखर है। पत्थरों का संतुलन ही इसकी मजबूती का कारण माना जाता है।
आज भी लोगों को हैरान करता है मंदिर
ककनमठ मंदिर आज भी मुरैना के एक शांत इलाके में खड़ा है और इसे देखने आने वाले लोग इसकी बनावट देखकर चकित रह जाते हैं। बिना आधुनिक तकनीक और मशीनों के इतने बड़े पत्थरों को इस तरह संतुलित करके बनाना आज भी लोगों के लिए एक रहस्य बना हुआ है।
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