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Scientists Salary: मध्यप्रदेश में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के वैज्ञानिक पांच महीने से वेतन न मिलने और भत्तों में कटौती से परेशान हैं। नाराज होकर उन्होंने काम करने से इनकार कर दिया है, जिससे कृषि विज्ञान केंद्रों पर संकट गहरा गया है।
300 वैज्ञानिक प्रभावित
प्रदेश में 300 कृषि वैज्ञानिक कृषि विश्वविद्यालयों से अलग होकर कृषि विज्ञान केंद्रों में काम कर रहे हैं। बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की बैठक में तय किया गया कि यदि वेतन की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वैज्ञानिक अपने मूल विभाग, कॉलेज या विश्वविद्यालय में वापस जाने के लिए आवेदन करेंगे।
दो स्तरों पर हो रहा संचालन
प्रदेश में 66 कृषि विज्ञान केंद्र इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (ICAR) के अंतर्गत आते हैं, जबकि 53 केंद्रों का संचालन जबलपुर और ग्वालियर के कृषि विश्वविद्यालयों के तहत होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार दो साल से वेतन और भत्तों में कटौती हो रही है। मेडिकल भत्ता, ग्रेच्युटी और नेशनल पेंशन योजना (NPS) जैसी सुविधाएं भी बंद कर दी गई हैं।
वैज्ञानिकों की मांग
मैनेजमेंट बोर्ड की बैठक में वैज्ञानिकों ने अपनी सेवाएं वापस लेने का प्रस्ताव पारित किया। इसके साथ ही अनुसंधान कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र के खर्च से अस्थायी कर्मियों की भर्ती करने की सिफारिश की गई है।
डॉ. एके सिंह, अध्यक्ष, केवीके फोरम:
“कृषि विज्ञान केंद्र जिला स्तर पर एकमात्र प्रौद्योगिकी आधारित संस्थान है। इसे बेहतर बनाने की बजाय कमजोर किया जा रहा है।”
डॉ. पीके गुप्ता, जनरल सेक्रेटरी, EWUA MP:
“अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो वैज्ञानिक अपने मूल विभाग में लौट जाएंगे।”
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