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मराठा आंदोलन में हंगामा: अभिनेत्री सुमोना की कार पर हमला, महिला पत्रकारों से बदसलूकी, कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर मुंबई में हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। अभिनेत्री सुमोना चक्रवर्ती और कुछ महिला पत्रकारों के साथ हुई घटनाओं ने शहर की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


🎭 सुमोना चक्रवर्ती की कार पर हमला

  • ‘द कपिल शर्मा शो’ फेम अभिनेत्री सुमोना चक्रवर्ती ने बताया कि 31 अगस्त को, जब वो कोलाबा से फोर्ट की ओर जा रही थीं, तो कुछ प्रदर्शनकारियों ने उनकी कार को घेर लिया

  • एक व्यक्ति ने उनकी कार के बोनट पर जोर से हाथ मारा, जबकि दूसरे लोग खिड़कियों पर हाथ मारते हुएजय महाराष्ट्र’ के नारे लगा रहे थे और हंस रहे थे

  • उन्होंने कहा, “5 मिनट में यह घटना दो बार हुई, लेकिन कोई पुलिस नजर नहीं आई। जो पुलिसवाले थे, वे आराम से बातें कर रहे थे।”


🚗 “पहली बार खुद को असुरक्षित महसूस किया” – सुमोना

  • सुमोना ने इंस्टाग्राम पर अपना अनुभव शेयर करते हुए लिखा:

    • मुंबई में पहली बार इतना असुरक्षित महसूस किया। शुक्र है मेरे साथ एक पुरुष मित्र था। अगर मैं अकेली होती तो क्या होता?”

    • “प्रदर्शनकारी सड़क और फुटपाथों पर खाना बना रहे थे, नहा रहे थे, वीडियो कॉल और रील बना रहे थे। चारों तरफ गंदगी और अव्यवस्था थी।”


📢 पत्रकारों से भी बदसलूकी

  • आंदोलन के दौरान महिला पत्रकारों के साथ भी बदसलूकी की गई।

  • TV जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने आंदोलन का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है अगर ऐसे मामले फिर हुए।

  • मुंबई प्रेस क्लब ने भी इस घटना की निंदा की है।


🙏 मनोज जरांगे की अपील

  • मराठा आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मनोज जरांगे ने कहा:

    • “हर व्यक्ति से सम्मान से पेश आना चाहिए।”

    • “प्रदर्शनकारी गरीब और दूर-दराज के गांवों से आए हैं, उन्हें समझने की जरूरत है।”


🧾 आंदोलन की पृष्ठभूमि

  • मनोज जरांगे मराठा समुदाय को ओबीसी आरक्षण में 10% आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं।

  • वे मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।


🛑 क्या उठते हैं सवाल?

  • अभिनेत्री और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं।

  • सुमोना ने कहा, “हम टैक्स देने वाले नागरिक हैं। हमें अपने ही शहर में सुरक्षित महसूस करने का अधिकार होना चाहिए।


🔚 निष्कर्ष:

शांति से शुरू हुआ आंदोलन अब हिंसक और असंवेदनशील रूप लेता जा रहा है। ऐसे में सरकार और पुलिस प्रशासन को तुरंत सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि आम लोग, महिलाएं और मीडिया कर्मी खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।

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