29 अप्रैल 2025
कनाडा की राजनीति में हाल ही में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे के बाद मात्र एक महीने पहले लिबरल पार्टी की कमान संभालने वाले मार्क कार्नी ने आम चुनाव में जोरदार जीत हासिल की है और देश के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं। राजनीतिक अनुभव की कमी के बावजूद, उनकी जीत को “चमत्कारी वापसी” कहा जा रहा है।
राजनीति में नई शुरुआत, लेकिन प्रभावशाली नेतृत्व
मार्च 2025 में प्रधानमंत्री बनने वाले मार्क कार्नी ने उस समय पदभार संभाला जब उनके पास संसद की सदस्यता तक नहीं थी। वे कनाडा के इतिहास में ऐसे केवल दूसरे व्यक्ति हैं जो सांसद न होते हुए प्रधानमंत्री बने। इस चुनाव में उन्होंने ओटावा के पास नेपियन सीट से जीत हासिल कर संसद में भी अपनी जगह बना ली।
अर्थव्यवस्था के माहिर, अब देश की बागडोर संभाली
कार्नी राजनीति में भले ही नए हों, लेकिन अर्थशास्त्र में उनका लंबा और प्रभावशाली करियर रहा है।
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2008 से 2013 तक वे बैंक ऑफ कनाडा के गवर्नर रहे।
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इसके बाद वे बैंक ऑफ इंग्लैंड के प्रमुख बने — इस पद को संभालने वाले पहले गैर-ब्रिटिश व्यक्ति।
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वे फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बोर्ड के चेयर (2011-2018) और संयुक्त राष्ट्र के क्लाइमेट फाइनेंस दूत (2019-2025) भी रह चुके हैं।
ट्रंप पर कड़ा रुख, अमेरिका को साफ संदेश
कार्नी ने अपनी जीत के बाद दिए भाषण में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की। उन्होंने कहा, “अमेरिका हमें बांटने की कोशिश कर रहा है, लेकिन कनाडा अपनी संप्रभुता से कभी समझौता नहीं करेगा।”
ट्रंप द्वारा कनाडा को “51वां राज्य” कहे जाने जैसे विवादित बयानों पर कार्नी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
पर्यावरण और नीति परिवर्तन
मार्क कार्नी पर्यावरण संरक्षण के समर्थक रहे हैं।
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उन्होंने नेट ज़ीरो को लेकर ग्लोबल फाइनेंशियल अलायंस की शुरुआत की।
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हाल ही में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने कार्बन टैक्स नीति को समाप्त कर दिया, जिसे पहले ट्रूडो सरकार ने लागू किया था।
एक विनम्र शुरुआत से शिखर तक
फोर्ट स्मिथ (नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज) में जन्मे कार्नी ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पीएचडी की। आइस हॉकी खेलने वाले यह शख्स अब देश की कमान संभाल रहे हैं। उनके पास कभी कनाडा और आयरलैंड दोनों की नागरिकता थी, लेकिन अब उन्होंने सिर्फ कनाडा की नागरिकता रखना चुना।
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