पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में और तनाव आ गया है। इसी माहौल में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने अपनी पुरानी बयानबाज़ी से उलट अब संयम की बात कही है। वही बिलावल, जिन्होंने कभी सिंधु में खून बहाने और परमाणु हमले जैसी धमकियां दी थीं, अब शिमला समझौते को लेकर शहबाज शरीफ सरकार के रुख पर सवाल उठा रहे हैं।
शिमला समझौते को रद्द करने पर जताई आपत्ति
एक पाकिस्तानी टेलीविज़न कार्यक्रम में बातचीत करते हुए बिलावल भुट्टो ने कहा कि शिमला समझौते जैसे द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय समझौते कूटनीति की बुनियाद होते हैं, और ऐसे किसी भी समझौते से जल्दबाज़ी में बाहर आना गलत कदम हो सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि,
“अगर भारत की जिद बनी रहती है, तो फिर सभी समझौतों की समीक्षा होनी चाहिए, लेकिन पहले संवाद के जरिए समाधान की कोशिश की जानी चाहिए।”
भारत से की बातचीत की अपील
बिलावल ने कहा कि यदि भारत आतंकवाद के खिलाफ वाकई गंभीर है, तो उसे रचनात्मक और पारदर्शी बातचीत का रास्ता अपनाना होगा। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले पर निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि यदि भारत इससे इनकार करता है, तो इससे उसकी अंतरराष्ट्रीय साख को नुकसान पहुंच सकता है।
तनाव के बीच नरम रुख क्यों?
बिलावल भुट्टो का बदला हुआ यह रवैया इस ओर इशारा करता है कि पाकिस्तान के भीतर भी अब कुछ राजनेता आक्रामक नीति की बजाय कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने की वकालत कर रहे हैं। हालांकि, हालात कैसे आगे बढ़ते हैं, यह दोनों देशों की रणनीति और संवाद की इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा।
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