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मेरठ में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने श्री हनुमंत कथा के दौरान कई बड़े बयान दिए। उन्होंने कहा कि चित्र कैसा भी हो, लेकिन चरित्र हमेशा अच्छा होना चाहिए क्योंकि चित्र दोबारा बनाया जा सकता है, लेकिन चरित्र पर लगा दाग कभी नहीं मिटता।
शिक्षा और घर टूटने का संबंध
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि आज घरों के टूटने का कारण ज्यादा शिक्षित होना बन गया है। उन्होंने बताया कि ज्यादा पढ़ाई के कारण संस्कारों की कमी हो रही है और लोग धार्मिक आयोजनों से दूर होकर पाश्चात्य संस्कृति को अपना रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पहले लोग कम पढ़े-लिखे थे, लेकिन पूरे कपड़े पहनते थे, जबकि अब शिक्षित लोग कम कपड़े पहनने लगे हैं।
मेरठ से हिंदू राष्ट्र की क्रांति की शुरुआत
उन्होंने कहा कि मेरठ ने पहले स्वतंत्रता संग्राम की क्रांति शुरू की थी, अब यहीं से हिंदू राष्ट्र की क्रांति की आवाज उठनी चाहिए। उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा कि देश को जोड़ने वाले लोग महान होते हैं, जबकि देश को तोड़ने वाले महान नहीं हो सकते।
जीवन में मंगल जरूरी
आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “मस्त रहो, व्यस्त रहो। मंगल ग्रह पर जीवन हो या न हो, लेकिन जीवन में मंगल जरूर होना चाहिए।” उन्होंने बताया कि हनुमान जी की भक्ति से सभी दुख और कुंडली के दोष दूर हो सकते हैं।
चरित्र सबसे महत्वपूर्ण
उन्होंने कहा कि चित्र से ज्यादा चरित्र महत्वपूर्ण है। कोई भी चित्र दोबारा बनाया जा सकता है, लेकिन एक बार चरित्र पर दाग लग जाए, तो वह कभी नहीं मिटता। उन्होंने लोगों को अच्छे कर्म करने और दूसरों के सुख-दुख में साथ देने की सलाह दी।
संगति का प्रभाव
उन्होंने अच्छी संगति के महत्व को समझाते हुए कहा कि बुरी संगति इंसान को पछताने पर मजबूर कर देती है, जबकि अच्छी संगति सफलता की ओर ले जाती है। उन्होंने हनुमान जी की भक्ति को राम भक्ति का माध्यम बताया और इसे अपनाने की सलाह दी।
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