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उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर 20 नवंबर को मतदान हुआ। इनमें मीरापुर, कुंदरकी, गाजियाबाद, खैर, करहल, सीसामऊ, फूलपुर, कटेहरी और मझवां सीटें शामिल थीं। मतगणना सुबह 8 बजे से शुरू हुई और नतीजे लगभग स्पष्ट हो चुके हैं। भाजपा ने 7 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि सपा ने 2 सीटों (करहल और सीसामऊ) पर जीत हासिल की। इन नतीजों पर नेताओं की प्रतिक्रियाएं जानें:मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन परिणामों को भाजपा-एनडीए की नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जीत बताया। उन्होंने कहा, “बंटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे-सेफ रहेंगे।” योगी ने जनता का आभार जताते हुए इसे सुशासन और विकास की जीत करार दिया।
सपा का आरोप: प्रशासन और पुलिस ने लड़ा चुनाव
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा, “यह चुनाव निष्पक्ष नहीं था। पुलिस और सत्ता ने मिलकर चुनाव लड़ा।” उन्होंने दावा किया कि कुंदरकी और सीसामऊ जैसे क्षेत्रों में सपा समर्थकों को वोट डालने से रोका गया। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी की जीत का श्रेय जनता को दिया।
कांग्रेस का आरोप: सरकारी तंत्र का दुरुपयोग
कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा, “पुलिस और प्रशासन के सहारे भाजपा ने मतदाताओं को डराया-धमकाया। यह लोकतंत्र की हत्या है।” उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने पूरे सरकारी तंत्र को अपने पक्ष में इस्तेमाल किया।
डिंपल यादव का तीखा बयान: “बीजेपी की गुंडागर्दी”
सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा, “प्रशासन भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहा है। मतदाताओं को वोट डालने से रोका गया और सपा कार्यकर्ताओं को परेशान किया गया।” उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया।
केशव प्रसाद मौर्य का पलटवार
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सपा को “समाप्तवादी पार्टी” कहा और उनके गठबंधन (पीडीए) को “परिवार डेवलपमेंट एजेंसी” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के कार्यकर्ता कानून-व्यवस्था बिगाड़ने में शामिल हैं और सपा का अस्तित्व खत्म होने वाला है।
जियाउर्रहमान बर्क का आरोप: लोकतंत्र की हत्या
सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा, “कुंदरकी सीट पर चुनाव निष्पक्ष होता तो सपा बड़ी जीत हासिल करती।” उन्होंने प्रशासन पर मतदाताओं को प्रभावित करने और लोगों को वोट डालने से रोकने का आरोप लगाया।
नतीजों से बढ़ा राजनीतिक तनाव
यूपी उपचुनाव के नतीजों ने सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दलों के बीच तनाव और बढ़ा दिया है। जहां भाजपा इसे अपनी नीतियों की जीत बता रही है, वहीं विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ये नतीजे आगामी चुनावों में और अधिक राजनीतिक टकराव का संकेत देते हैं।
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