प्रिस्टिना (कोसोवो): दक्षिण-पूर्वी यूरोप के छोटे से देश कोसोवो की राजधानी प्रिस्टिना में इन दिनों अरबी संस्कृति और इस्लामी विरासत की अनूठी छटा देखने को मिल रही है। सऊदी अरब के सहयोग से आयोजित ‘जोसूर प्रदर्शनी’ में इस्लामिक इतिहास, संस्कृति और भाईचारे का संदेश गूंज रहा है। इस दस दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री अल्बिन कुर्ती ने किया, जिन्होंने सऊदी अरब के सहयोग को “ऐतिहासिक और भावनात्मक” करार दिया।
‘जोसूर’—अरबी संस्कृति से जुड़ने का सेतु
‘जोसूर’ एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है “पुल”। यह नाम इस प्रदर्शनी की भावना को पूरी तरह दर्शाता है, जिसका उद्देश्य कोसोवो और सऊदी अरब के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुल बनाना है। यह छठी बार है जब ‘जोसूर’ प्रदर्शनी का आयोजन हुआ है, और इस बार इसका आयोजन प्रिस्टिना के स्कैंडरबेग स्क्वायर में किया जा रहा है।
प्रदर्शनी में क्या है खास?
इस कार्यक्रम में इस्लामी इतिहास, अरबी हस्तशिल्प, पारंपरिक संगीत, पवित्र ग्रंथों की प्रतिलिपियां और सांस्कृतिक गतिविधियों की झलक दिखाई जा रही है। आयोजकों का कहना है कि यह पहल केवल संस्कृति दिखाने के लिए नहीं है, बल्कि लोगों में दया, एकता और न्याय जैसे मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए भी है।
सऊदी अरब—कोसोवो का पुराना मित्र
प्रधानमंत्री कुर्ती ने अपने संबोधन में कहा कि सऊदी अरब ने कोसोवो की कठिन घड़ी में हमेशा साथ दिया है। उन्होंने याद किया कि कोसोवो युद्ध के दौरान सऊदी अरब ने न केवल 20 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता भेजी थी, बल्कि खाद्य सामग्री और दवाएं भी मुहैया कराईं। इतना ही नहीं, 2008 में जब कोसोवो ने स्वतंत्रता की घोषणा की, तो सऊदी अरब सबसे पहला देश था जिसने उसे मान्यता दी।
रणनीतिक रिश्ते की ओर बढ़ते कदम
कुर्ती ने जोर देकर कहा कि कोसोवो और सऊदी अरब का रिश्ता अब केवल दोस्ती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रणनीतिक साझेदारी में तब्दील हो रहा है। उन्होंने शिक्षा, पर्यटन, व्यापार और यात्रा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के सहयोग का उल्लेख करते हुए इसे भविष्य की मजबूत साझेदारी का संकेत बताया।
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