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राइजिंग राजस्थान समिट: 1.21 लाख करोड़ के एमओयू में सिर्फ 10,590 करोड़ रुपए निवेश

अलवर: 2024 में राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट आयोजित किया गया था। इसका उद्देश्य प्रदेश में ज्यादा उद्योग लगाना और रोजगार पैदा करना था। लेकिन अब तक इसका असर सीमित रहा है।

एमओयू और निवेश की स्थिति

  • समिट के बाद 26 विभागों में 714 एमओयू हुए, जिनकी कुल राशि 1.21 लाख करोड़ रुपए थी।

  • धरातल पर सिर्फ 168 एमओयू में काम शुरू हुआ, कुल निवेश 10,590 करोड़ रुपए ही हुआ।

  • इनमें से 66 उद्योगों में उत्पादन भी शुरू हो पाया।

  • उद्योग विभाग के 43 एमओयू में से 29 धरातल पर आ गए और 14 में उत्पादन शुरू हो चुका है। कुल उद्योग विभाग के एमओयू का मूल्य 141 करोड़ रुपए है।

रोजगार की स्थिति

  • इन उद्योगों में 17,865 लोगों को रोजगार मिलना था।

  • अब तक सिर्फ 1,672 लोगों को रोजगार मिल पाया है।

समस्याएं

  • अधिकांश एमओयू में जमीन की डिमांड थी, लेकिन उद्योगपतियों को जमीन पसंद नहीं आई।

  • अलवर एनसीआर क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण केवल नॉन-पॉल्यूटेड उद्योगों को मंजूरी मिल रही है।

  • केवल एग्रीकल्चर प्रोसेसिंग यूनिट्स जैसे उद्योग ही यहां स्थापित हो पा रहे हैं।

नए औद्योगिक क्षेत्र और भूखंड

  • मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र में भूखंड खत्म हो चुके हैं।

  • कठूमर के रूंध सौंकरी में नया औद्योगिक क्षेत्र बनाया गया है, जिसमें 123 भूखंड हैं।

  • अब तक रीको ने चार भूखंड अलॉट किए हैं।

  • उद्योगपतियों को उनके डिमांड के अनुसार भूखंड दिखाए जा रहे हैं और कुछ में उत्पादन भी शुरू हो गया है।

संजय प्रधान, महाप्रबंधक, उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र का कहना है कि एमओयू लगातार हो रहे हैं और निवेश धीरे-धीरे धरातल पर आ रहा है।

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