डेरेक ओ ब्रायन का बयान
टीएमसी सांसद और राज्यसभा में पार्टी के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “एक देश, एक चुनाव” का प्रस्ताव देश के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का हथियार है। उन्होंने अपने ब्लॉग में लिखा कि यह कदम बेरोजगारी, महंगाई, संघीय सरकार विरोधी नीतियों, मणिपुर की स्थिति, गिरते रुपये और ईंधन की ऊंची कीमतों जैसे गंभीर मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए उठाया गया है।
टीएमसी का विरोध
टीएमसी ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा कि उनके सांसद संसद में इस कानून का जोरदार विरोध करेंगे। डेरेक ओ ब्रायन ने इसे महिला आरक्षण विधेयक जैसा कदम बताया, जिसमें इसे तुरंत लागू करने के बजाय इसे 2034 तक के लिए टाल दिया गया।
संविधान में संशोधन की जरूरत
डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि “एक देश, एक चुनाव” लागू करने के लिए संविधान में बड़े बदलाव की जरूरत होगी। इसके लिए संसद में विशेष बहुमत से संशोधन पारित करना होगा, जिसमें सदन की कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई का समर्थन जरूरी होगा।
राज्यों की भूमिका
उन्होंने कहा कि पंचायत और नगरपालिका चुनाव एक साथ कराने के लिए अनुच्छेद 324ए में बदलाव के लिए कम से कम आधे राज्यों की सहमति जरूरी होगी। इसके अलावा, एकल मतदाता सूची के लिए भी संविधान में संशोधन और राज्यों की मंजूरी की आवश्यकता होगी।
राज्यों का प्रतिनिधित्व नहीं
डेरेक ओ ब्रायन ने यह भी कहा कि इस प्रस्ताव पर बनी उच्च स्तरीय समिति में किसी भी राज्य का प्रतिनिधि या मुख्यमंत्री शामिल नहीं था। चूंकि यह प्रस्ताव राज्यों की विधानसभाओं और सरकारों के कार्यकाल को सीधे प्रभावित करेगा, इसलिए केंद्र सरकार को इसे लागू करने से पहले बहुत सावधानी बरतनी चाहिए और राज्यों की सहमति लेनी चाहिए।
टीएमसी ने साफ किया है कि वह इस प्रस्ताव के खिलाफ मजबूती से खड़ी रहेगी और इसे संसद में पूरी ताकत से चुनौती देगी।
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