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राजस्थान का नया जिला बालोतरा अब भी सुविधाओं से वंचित, डेढ़ साल बाद भी इंतजार

बालोतरा।
राजस्थान के नए जिले बालोतरा को बने हुए 7 अगस्त 2023 से डेढ़ साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक यहां के लोग जिला बनने से मिलने वाली सुविधाओं का इंतजार ही कर रहे हैं। बालोतरा को बाड़मेर से अलग करके नया जिला बनाया गया था, जिसमें चार उपखंड और सात तहसीलें शामिल की गई थीं।

अब तक क्या-क्या हुआ?

हालांकि यहां कलेक्टर और एसपी के ऑफिस खुल गए हैं, लेकिन शहर और गांवों में बुनियादी सुविधाएं जैसे पानी, बिजली, सड़क और सीवरेज की हालत अब भी खराब है।

टूटी सड़कों से लोग परेशान

शहर की सड़कें टूटी हुई हैं और कई जगहों पर जाम की समस्या बनी रहती है। संकरी सड़कों और ओवरब्रिज के नीचे पार्किंग की कमी के कारण लोगों को काफी परेशानी होती है। नए बस स्टैंड के पास गंदा नाला अब भी साफ नहीं किया गया है।

ड्रेनेज और बारिश में दिक्कत

शहर में ड्रेनेज सिस्टम नहीं होने से बारिश के दिनों में शास्त्री सर्किल, भगतसिंह सर्किल, नेहरू कॉलोनी और जिला अस्पताल के आसपास पानी भर जाता है। खुले नालों में पशु गिर जाते हैं और उन्हें निकालना मुश्किल हो जाता है।

घोषणाएं बहुत, काम नहीं

पूर्व सरकार ने 35 करोड़ रुपए से गंदे नाले का सौंदर्यीकरण और अन्य विकास कार्यों की घोषणा की थी। साथ ही 2 करोड़ रुपए में मेगा हाईवे तक सड़क बनाने की योजना भी पास हुई थी, लेकिन इनमें से कोई भी काम शुरू नहीं हुआ

नई सरकार के बजट में क्या-क्या मिला?

राज्य सरकार ने 2025-26 बजट में बालोतरा व सिवाना के लिए:

  • 19.70 करोड़ रुपए बफर स्टोरेज के लिए,

  • 50 करोड़ की डीपीआर रिंग रोड के लिए,

  • और 3 करोड़ की लागत से 11.5 किलोमीटर लंबी रिंग रोड बनाने का प्रावधान किया है।

इसके अलावा बालोतरा में:

  • नगर विकास न्यास (यूआईटी)

  • मिनी सचिवालय

  • पॉलिटेक्निक कॉलेज

  • खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट
    बनाने की घोषणाएं भी की गई हैं।

जनता की नाराजगी

अमित सिंघवी, स्थानीय उद्यमी कहते हैं कि पार्क और टाउन हॉल बर्बाद हो गए हैं, स्टेडियम अधूरा है, और सरकार का सीवरेज व सड़क प्रबंधन पूरी तरह फेल है।

जनक चोपड़ा, एक अन्य उद्यमी का कहना है कि बालोतरा एक बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है, लेकिन रेलवे सुविधा बढ़ाने और सड़कों से अतिक्रमण हटाने की सख्त जरूरत है।

निष्कर्ष:
बालोतरा को जिला बने भले ही डेढ़ साल हो चुके हैं, लेकिन लोगों को अभी भी जमीनी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। सरकार की घोषणाएं कागजों तक सीमित हैं और जनता अब भी इंतजार में है।

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