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क्या है मामला?
राजस्थान के बाड़मेर, बीकानेर, अलवर, बांसवाड़ा और उदयपुर जिलों में रेअर अर्थ मेटल्स (दुर्लभ मृदा धातु) के भंडार मिले हैं। इन धातुओं का इस्तेमाल मोबाइल, कार, सोलर और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस में होता है।
एमबीएम यूनिवर्सिटी का बड़ा कदम
एमबीएम विश्वविद्यालय जोधपुर ने इन धातुओं की स्टडी और तकनीकी विकास के लिए जोधपुर में “रेअर अर्थ मेटल एक्सीलेंस सेंटर” बनाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। इस प्रोजेक्ट की लागत 172.65 करोड़ रुपये है।
क्या होगा इस सेंटर में?
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रेअर अर्थ मेटल्स की सटीक मैपिंग की जाएगी।
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इन्हें निकालने के लिए सस्ती और आसान तकनीक विकसित की जाएगी।
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सेंटर में स्टूडेंट्स के लिए कोर्स भी शुरू होंगे जिससे उन्हें रोजगार मिलेगा।
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इससे राज्य का तकनीकी विकास और खनन क्षेत्र मजबूत होगा।
क्यों जरूरी है यह सेंटर?
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रेअर अर्थ मेटल्स की संख्या 17 होती है, जिनमें 15 लैंथेनाइड, स्कैंडियम और यिट्रियम शामिल हैं।
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इन धातुओं में चुंबकीय, रोशनी छोड़ने वाले और इलेक्ट्रोकेमिकल गुण होते हैं।
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भारत में ये धातुएं मिलती जरूर हैं लेकिन इनको निकालने की तकनीक नहीं है।
चीन पर निर्भरता से मुक्ति जरूरी
प्रोजेक्ट इंचार्ज डॉ. अरविंद वर्मा ने बताया कि आज भारत अपने 80% रेअर अर्थ मेटल्स चीन से आयात करता है।
अगर भविष्य में चीन ने सप्लाई रोक दी, तो देश का इलेक्ट्रॉनिक उद्योग खतरे में पड़ सकता है।
इसलिए भारत को अपनी खुद की तकनीक और संसाधन विकसित करने की जरूरत है।
निष्कर्ष:
अगर यह प्रोजेक्ट मंजूर हो जाता है, तो राजस्थान न सिर्फ देश में बल्कि दुनिया में रेअर अर्थ मेटल्स का हब बन सकता है। इससे रोजगार, तकनीकी प्रगति और आर्थिक विकास में बड़ी मदद मिलेगी।
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