Related Articles
राजस्थान:
राज्य के 8 जिलों के टीएसपी (जनजातीय उप योजना) क्षेत्रों में स्केबीज (खुजली) बीमारी को खत्म करने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान की शुरुआत सिरोही जिले के आबूरोड से हुई। इसमें घर-घर जाकर सर्वे किया जाएगा और स्केबीज से पीड़ित लोगों का इलाज कर गांवों को इस बीमारी से मुक्त बनाया जाएगा।
क्या है स्केबीज अभियान?
यह अभियान केंद्र सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय और एम्स जोधपुर के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसकी शुरुआत वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए मंत्रालय के सचिव विभु नायर ने की। उन्होंने सभी लोगों से अभियान को सफल बनाने की अपील की।
सिरोही और पिंडवाड़ा में शुरू हुआ सर्वे
सिरोही जिले के आबूरोड के सभी गांवों और पिंडवाड़ा ब्लॉक के चयनित गांवों में घर-घर सर्वे किया जा रहा है। स्केबीज से पीड़ित लोगों की जानकारी एकत्र की जा रही है ताकि समय पर उनका इलाज किया जा सके।
किन जिलों में चलेगा अभियान?
इस अभियान के तहत राजस्थान के 8 जिलों का चयन किया गया है:
-
सिरोही
-
पाली
-
बांसवाड़ा
-
डूंगरपुर
-
प्रतापगढ़
-
उदयपुर
-
राजसमंद
-
चित्तौड़गढ़
इन जिलों के टीएसपी क्षेत्र के गांवों में स्केबीज के ज्यादा मरीज पाए गए थे।
क्यों शुरू हुआ ये अभियान?
एम्स जोधपुर की टीम ने आदिवासी छात्रावासों और स्कूलों में स्वास्थ्य जांच की। आबूरोड के एक छात्रावास में जांच के दौरान 35% से ज्यादा बच्चे स्केबीज से पीड़ित मिले।
WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के अनुसार, अगर किसी क्षेत्र में 10% से ज्यादा लोग स्केबीज से पीड़ित हों, तो इसे महामारी माना जाता है। इसलिए सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए अभियान चलाने का फैसला किया।
अभियान में आशाओं की भूमिका
इस अभियान को सफल बनाने में आशा सहयोगिनियों की अहम भूमिका रहेगी।
-
पहले चरण में उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
-
जिले में करीब 300 आशाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है।
-
दिसंबर 2025 तक लगभग 10,000 लोगों को स्केबीज से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
निष्कर्ष:
स्केबीज जैसी आम दिखने वाली बीमारी अगर समय पर कंट्रोल न की जाए तो बड़ी समस्या बन सकती है। राजस्थान सरकार और केंद्र की ये पहल, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक सार्थक कदम है।
CHANNEL009 Connects India
