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राजस्थान: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के 8,000 से ज्यादा खनन पट्टाधारकों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने खनन बंद करने की समयसीमा दो महीने बढ़ा दी है। इस फैसले से न केवल खनन उद्योग को फायदा मिलेगा, बल्कि इससे जुड़े लाखों मजदूरों को भी अस्थायी राहत मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
🔹 न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने यह फैसला सुनाया।
🔹 यह फैसला राजस्थान सरकार की याचिका पर सुनवाई के बाद लिया गया।
🔹 सरकार ने तर्क दिया कि खनन बंद होने से लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी।
पर्यावरणीय स्वीकृति का मुद्दा
🔸 सुप्रीम कोर्ट ने यह भी विचार किया कि पर्यावरणीय मंजूरी (EC) देने का अधिकार जिला स्तरीय अधिकारियों के पास होगा या राज्य स्तरीय प्राधिकरण (SEIAA) के पास।
🔸 जब तक इस मुद्दे का कानूनी समाधान नहीं निकलता, खनन कार्य दो महीने तक जारी रहेगा।
राजस्थान सरकार की अपील पर राहत
✔️ सरकार ने कोर्ट से समयसीमा बढ़ाने की मांग की थी, ताकि खनन पट्टों के लिए जरूरी पर्यावरणीय स्वीकृतियां (EC) पूरी की जा सकें।
✔️ अगर समय नहीं बढ़ता, तो 8,000 खदानें बंद करनी पड़ती, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था और मजदूरों पर बुरा असर पड़ता।
✔️ सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अगर SEIAA किसी आवेदन को अस्वीकार करता है, तो पट्टाधारक कानूनी कदम उठा सकते हैं।
12 नवंबर 2024 का आदेश
📅 12 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने खनन को 31 मार्च 2025 तक जारी रखने की अनुमति दी थी, लेकिन पर्यावरणीय नियमों का पालन जरूरी था।
📅 31 मार्च की समयसीमा नजदीक आते ही राजस्थान सरकार ने अतिरिक्त समय की मांग की।
📅 कोर्ट ने मजदूरों और खनन व्यवसाय पर असर को देखते हुए दो महीने का विस्तार दिया।
👉 इस फैसले से राजस्थान के खनन उद्योग को अस्थायी राहत मिली है, जिससे लाखों मजदूरों की नौकरी बच सकेगी।
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