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राजस्थान में आने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर उम्मीदवारों के बीच लंबे समय से यह सवाल बना हुआ था कि क्या इस बार
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दो से ज्यादा संतान वालों को चुनाव लड़ने की अनुमति मिलेगी?
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और क्या शैक्षणिक योग्यता को अनिवार्य किया जाएगा?
अब राज्य सरकार ने इस पर स्पष्ट स्थिति बता दी है।
सरकार का साफ जवाब: अभी नियम नहीं बदलेंगे
राज्य सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल पात्रता नियमों में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा। यानी आने वाले चुनाव पुराने नियमों के अनुसार ही होंगे।
शैक्षणिक योग्यता पर क्या फैसला?
सरकार ने बताया कि:
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निकाय या पंचायत चुनाव लड़ने के लिए पढ़ाई की कोई न्यूनतम शर्त नहीं है
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कम पढ़े-लिखे या अनपढ़ उम्मीदवार भी पहले की तरह चुनाव लड़ सकते हैं
स्वायत्त शासन विभाग (DLB) ने स्पष्ट किया कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है।
यह जानकारी पूसाराम गोदारा के सवाल के लिखित जवाब में दी गई।
दो संतान नीति का क्या होगा?
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दो संतान नीति हटाने पर चर्चा जरूर चल रही है
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लेकिन यह मामला अभी प्रक्रियाधीन (Under Process) है
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न तो कोई बिल पास हुआ है और न ही कोई नया नियम लागू हुआ है
यानि जिन उम्मीदवारों के दो से अधिक बच्चे हैं, उन्हें अभी कोई राहत नहीं मिली है।
राजनीति में मिली-जुली प्रतिक्रिया
विरोध में राय
पूर्व पार्षद दशरथ सिंह शेखावत का कहना है कि
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कम संतान नीति समाज के लिए उदाहरण होनी चाहिए
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जनप्रतिनिधियों के लिए पढ़ाई जरूरी होनी चाहिए
समर्थन में राय
पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल ने फैसले का समर्थन किया और कहा कि
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पढ़ाई की शर्त न होने से ज्यादा लोगों को चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा
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ग्रामीण इलाकों में कई अच्छे उम्मीदवार सामने आ सकेंगे
भविष्य में क्या बदल सकता है?
हालांकि अभी नियम नहीं बदले हैं, लेकिन
झाबर सिंह खर्रा के पुराने बयानों से संकेत मिलता है कि
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भविष्य में नियमों में बदलाव का प्रस्ताव
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कैबिनेट और विधानसभा में आ सकता है
लेकिन अभी के लिए यह तय है कि आने वाले चुनाव पुराने नियमों से ही होंगे।
उम्मीदवारों के लिए साफ संदेश
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दो से ज्यादा बच्चों वाले उम्मीदवारों को अभी इंतजार करना होगा
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पढ़ाई की अनिवार्यता की उम्मीद कर रहे उम्मीदवारों को भी निराशा हाथ लगी है
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सभी को बराबरी की सीधी चुनावी टक्कर के लिए तैयार रहना होगा
रवि जैन ने भी स्पष्ट किया कि
“दो संतान नीति पर चर्चा चल रही है, लेकिन फिलहाल यह सिर्फ प्रक्रियाधीन है।”
निष्कर्ष
👉 आगामी पंचायत और निकाय चुनावों में कोई नया नियम लागू नहीं होगा।
👉 पुराने नियम ही मान्य रहेंगे।
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