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राजस्थान में पंचायतराज और निकाय चुनाव अप्रैल में होने की संभावना है। माना जा रहा है कि मार्च के पहले सप्ताह में आचार संहिता लागू हो सकती है। चुनाव की आहट से गांवों और कस्बों में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। खासकर युवा वर्ग पंच, सरपंच, प्रधान और जिला प्रमुख बनने की तैयारी में जुट गया है।
युवाओं पर रहेगा पार्टियों का फोकस
इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल युवाओं को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। हाल ही में युवा नेताओं को जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इससे संकेत मिल रहा है कि चुनाव में नई पीढ़ी की भागीदारी बढ़ेगी।
दो बच्चों की शर्त हटने की चर्चा
चुनाव प्रक्रिया में बड़ा बदलाव यह हो सकता है कि दो बच्चों वाली शर्त को हटाया जाए। पहले इस नियम के कारण कई लोग चुनाव नहीं लड़ पाते थे। यदि यह शर्त हटती है तो दावेदारों की संख्या बढ़ सकती है।
अगले महीने होगी वार्ड आरक्षण की लॉटरी
अगले माह वार्ड आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के वार्ड पहले ही तय हो चुके हैं। वार्डवार आरक्षण के बाद उम्मीदवारों की स्थिति साफ होगी।
सोशल मीडिया पर सक्रिय युवा
गांवों में चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं। युवा सोशल मीडिया और जनसभाओं के जरिए अपनी दावेदारी दिखा रहे हैं। निकाय चुनाव में भी युवाओं को टिकट देने की मांग बढ़ रही है।
प्रशासन ने शुरू की तैयारी
प्रशासन ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से कराई जाए।
पंच और सरपंच के चुनाव बैलेट पेपर से होंगे, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य के चुनाव ईवीएम से कराए जाएंगे।
नेताओं के बयान
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कांग्रेस जिलाध्यक्ष सऊद सईवी ने कहा कि इस बार युवाओं को ज्यादा मौका दिया जाएगा।
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भाजपा जिलाध्यक्ष चन्द्रवीरसिंह ने कहा कि जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी और युवाओं पर भी ध्यान रहेगा।
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उप जिला निर्वाचन अधिकारी रामरतन सौंकरिया ने बताया कि चुनाव सेल का गठन कर दिया गया है और अधिकारियों की ड्यूटी लगा दी गई है।
कुल मिलाकर, पंचायत चुनाव को लेकर प्रदेश में उत्साह बढ़ रहा है और इस बार युवाओं की भागीदारी पहले से अधिक देखने को मिल सकती है।
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