राजस्थान में बजट सत्र के दौरान राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भजनलाल सरकार के बजट 2026-27 को ‘असंवेदनशील’ बताया है। उन्होंने कहा कि इस बजट में विशेष योग्यजन (दिव्यांग) वर्ग की अनदेखी की गई है।
दिव्यांग विश्वविद्यालयों को लेकर सवाल
अशोक गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार के समय जयपुर में बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय और जोधपुर में महात्मा गांधी दिव्यांग विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। उनका उद्देश्य दिव्यांग शिक्षा को बढ़ावा देना था।
गहलोत का आरोप है कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इन संस्थानों का काम ठप पड़ा है और उन्हें प्राथमिकता नहीं दी जा रही।
विशेष शिक्षकों की भर्ती पर नाराजगी
गहलोत ने यह भी कहा कि बजट में विशेष शिक्षकों की भर्ती को लेकर कोई स्पष्ट योजना नहीं दिखाई गई। उनके अनुसार, दिव्यांग बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष शिक्षकों की जरूरत होती है, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर चुप है।
पेंशन और योजनाओं में बढ़ोतरी नहीं
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि दिव्यांगों की पेंशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में भी कोई खास बढ़ोतरी नहीं की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि कमजोर और वंचित वर्गों के लिए बजट में बड़ी घोषणाएं क्यों नहीं की गईं।
विनियोग विधेयक से उम्मीद
गहलोत ने कहा कि अब विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) के दौरान सरकार को इन कमियों को दूर करना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार दिव्यांग वर्ग के हित में ठोस कदम उठाएगी।
कुल मिलाकर, बजट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
CHANNEL009 Connects India
