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राजस्थान में अचानक बदले मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भीलवाड़ा, कोटा, राजसमंद, झुंझुनूं और अन्य जिलों में तेज हवा, बारिश और ओलावृष्टि से खड़ी और कटी फसलों को नुकसान पहुंचा है। सरसों, चना और लहसुन जैसी फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं।
भीलवाड़ा: अफीम बचाने के लिए खास उपाय
भीलवाड़ा जिले के सवाईपुर क्षेत्र में अफीम की फसल को बचाने के लिए किसान अनोखा तरीका अपना रहे हैं। बेमौसम बारिश से अफीम का द्रव्य बह न जाए, इसके लिए किसान डोडों को डिस्पोजल ग्लास से ढक रहे हैं।
नीलगाय और तोतों से फसल बचाने के लिए पहले से ही जाल और पहरा लगाया जाता था, लेकिन अब बारिश से बचाव के लिए यह नया जुगाड़ किया जा रहा है।
कोटा: मंडी में भीगा अनाज
कोटा की भामाशाह मंडी में खुले में रखा अनाज बारिश से भीग गया। इससे व्यापारियों और किसानों को नुकसान हुआ है। जिले में खेतों में कटी पड़ी सरसों और लहसुन की फसल भी खराब हुई है।
बारां जिले के कई गांवों में भी बारिश से फसल को नुकसान पहुंचा है।
झुंझुनूं: चिड़ावा और पिलानी में ओले
झुंझुनूं जिले के चिड़ावा और पिलानी क्षेत्र में चने के आकार के ओले गिरे। हालांकि यहां ज्यादा नुकसान की खबर नहीं है। कुछ जगहों पर बारिश से फसलों को फायदा भी बताया जा रहा है, लेकिन तेज हवा से फसलें झुक गई हैं।
राजसमंद और उदयपुर में ओलावृष्टि
राजसमंद जिले के केलवा और कुंवारिया में बेर के आकार के ओले गिरे। अन्य इलाकों में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश हुई। उदयपुर जिले के कुराबड़ क्षेत्र में भी बूंदाबांदी हुई।
किसानों को चिंता है कि पकने को तैयार फसल खराब न हो जाए।
हनुमानगढ़: आकाशीय बिजली से नुकसान
हनुमानगढ़ जिले के भादरा क्षेत्र में आकाशीय बिजली गिरने से मकानों के बिजली उपकरण और एक ट्रैक्टर की बैटरी खराब हो गई।
किसानों की बढ़ी चिंता
अचानक बदले मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। कई जगह फसल गिर गई है तो कहीं ओलों ने नुकसान पहुंचाया है। इस बीच अफीम उत्पादक किसानों का ‘डिस्पोजल ग्लास’ वाला उपाय उनकी मजबूरी और समझदारी दोनों को दिखाता है।
अब किसान मौसम साफ होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि आगे और नुकसान न हो।
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