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राजस्थान में किसान इन दिनों मंडियों में अपनी सरसों की फसल कम दाम पर बेचने को मजबूर हैं। सरकार की ओर से समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू नहीं होने से किसान परेशान हैं।
सरसों की कटाई जोरों पर, लेकिन खरीद का इंतजार
मार्च खत्म होने को है, लेकिन सरसों की सरकारी खरीद अभी तक शुरू नहीं हुई। किसान अपनी फसल की कटाई पूरी कर चुके हैं और पैसों की जरूरत के कारण उसे मंडियों में बेच रहे हैं। लेकिन यहां उन्हें समर्थन मूल्य से कम दाम मिल रहे हैं।
पिछले साल 15 मार्च से सरकारी खरीद शुरू हो गई थी, लेकिन इस साल अभी तक खरीद की कोई तैयारी नहीं दिख रही। किसान समर्थन मूल्य पर फसल बेचने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कोई दिशा-निर्देश नहीं मिलने से वे परेशान हैं।
समर्थन मूल्य का कोई फायदा नहीं
सरकार ने अभी तक खरीद की तारीख या पंजीकरण प्रक्रिया की जानकारी नहीं दी। किसान कहते हैं कि जब तक सरकार खरीद शुरू करेगी, तब तक आधी से ज्यादा फसल मंडियों में बिक चुकी होगी। ऐसे में समर्थन मूल्य पर खरीद का कोई फायदा नहीं होगा।
किसानों को हो रहा नुकसान
सरकार ने साल 2025-26 के लिए सरसों का समर्थन मूल्य 5,950 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है, जो 2024-25 की तुलना में 300 रुपए ज्यादा है। लेकिन अभी सरसों का बाजार भाव 5,200 से 5,500 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। इस वजह से किसानों को 500 से 700 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है।
किसानों की मांग
👉 सरसों की सरकारी खरीद 15 मार्च से शुरू होनी चाहिए थी।
👉 खरीद देर से होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
👉 सरकार सिर्फ किसानों को गुमराह कर रही है, जब तक खरीद शुरू होगी, तब तक ज्यादा फसल कम दाम में बिक चुकी होगी।
– लालचंद शर्मा, तहसील अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ
– रामभरोस मेहता, किसान
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