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छत्तीसगढ़ के नवागढ़ ब्लॉक के गौरव ग्राम सिवनी के हायर सेकंडरी स्कूल में छात्रों से सामूहिक नकल और अन्य सुविधाओं के बदले 300 रुपए मांगने का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल के प्राचार्य ने छात्रों के प्रवेश पत्र जमा कर लिए हैं और 21 मार्च को पैसे लेकर आने को कहा है। पैसे न देने पर परीक्षा से वंचित करने की धमकी दी गई है।
छात्र और अभिभावक परेशान
प्राचार्य की इस हरकत से छात्र और उनके अभिभावक काफी परेशान हैं। जब पत्रकारों की टीम ने स्कूल का दौरा किया, तो प्राचार्य के टेबल पर छात्रों के जमा किए गए प्रवेश पत्र रखे मिले। छात्रों ने खुलकर बताया कि 300 रुपए देने के बाद ही प्रवेश पत्र वापस मिलेगा।
एक लाख से ज्यादा का घोटाला
- इस परीक्षा केंद्र में चार स्कूलों के कुल 346 छात्र परीक्षा दे रहे हैं।
- हर छात्र से 300 रुपए की मांग की गई है, जिससे कुल रकम 1 लाख से ज्यादा हो जाती है।
- गरीब छात्रों के लिए 300 रुपए एक दिन की मजदूरी के बराबर है, लेकिन प्राचार्य को इतना वेतन मिलने के बावजूद यह रकम मांगी जा रही है।
पत्रकारों ने की पुष्टि
- जब एक अभिभावक ने अपने बच्चे का प्रवेश पत्र मांगा, तो प्राचार्य ने 21 मार्च को देने की बात कही।
- जब अभिभावक ने पूछा कि क्या इसके लिए 300 रुपए देने होंगे, तो प्राचार्य चुप हो गए।
- स्कूल के बाहर 5 छात्रों से पूछताछ करने पर सभी ने पैसे की मांग की पुष्टि की।
नकल के लिए पैसा वसूली?
- एक छात्र ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि 10-20 नंबर की नकल कराई जाती है ताकि परीक्षा का परिणाम अच्छा आए और शिक्षकों की वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) न रुके।
- इसके लिए सभी छात्रों से 300 रुपए देने का दबाव बनाया जा रहा है।
डीईओ बोले – 50 रुपए का नियम, 300 रुपए लेना गलत
- मामले की शिकायत कलेक्टर तक पहुंच चुकी है।
- डीईओ (जिला शिक्षा अधिकारी) अश्वनी कुमार भारद्वाज ने बताया कि अगर कोई प्रवेश पत्र गुम हो जाता है, तो नया जारी करने के लिए 50 रुपए लिए जा सकते हैं।
- 300 रुपए लेना गलत है और इसकी जांच कराई जाएगी।
प्राचार्य का बचाव
- स्कूल की प्राचार्य जयंती राठौर ने आरोपों को बेबुनियाद बताया।
- उन्होंने कहा कि कुछ छात्र प्रवेश पत्र खो देते हैं या फाड़ देते हैं, इसलिए सभी के प्रवेश पत्र जमा कर लिए गए हैं और 21 मार्च को अंतिम परीक्षा के दिन दिए जाएंगे।
- उन्होंने यह भी कहा कि छात्र कुछ भी कह सकते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि आरोप सही हैं।
निष्कर्ष
इस घटना से छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी है। जिला प्रशासन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन छात्रों का आरोप अगर सही निकला, तो यह एक गंभीर शिक्षा घोटाले की ओर इशारा करेगा।
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