राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य में अब केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों के सफल स्वास्थ्य मॉडल अपनाए जाएंगे। इसका सबसे ज्यादा फायदा गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को मिलेगा।
कौन-कौन से मॉडल होंगे लागू
चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अनुसार राजस्थान में जल्द ही इन योजनाओं को लागू किया जाएगा—
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केरल की हृदयम योजना
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तमिलनाडु की आपातकालीन प्रसूति देखभाल व्यवस्था
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तेलंगाना की टेली-स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU)
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एम्स के बेहतर इलाज मॉडल
इन योजनाओं से बच्चों और माताओं के इलाज में सुधार लाने का लक्ष्य है।
हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को मिलेगा फायदा
केरल की हृदयम योजना के तहत जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित 18 साल से कम उम्र के बच्चों को मुफ्त और बेहतर इलाज दिया जाता है। राजस्थान में इस योजना को 73 अस्पतालों तक फैलाया जाएगा, जिसमें मेडिकल कॉलेज, जिला और उप-जिला अस्पताल शामिल होंगे।
इस योजना में डॉक्टर संदिग्ध मरीज को ऑनलाइन पंजीकृत करता है और 24 घंटे में विशेषज्ञ उसकी जांच करता है, जिससे समय पर इलाज संभव होता है।
नवजात शिशुओं के लिए नई सुविधा
तेलंगाना की तर्ज पर राजस्थान में टेली-स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) बनाई जाएंगी। इसमें बड़े अस्पताल वीडियो कॉल के जरिए दूर-दराज के जिला अस्पतालों से जुड़ेंगे। विशेषज्ञ डॉक्टर ऑनलाइन सलाह देंगे, जिससे गंभीर नवजात शिशुओं की जान बचाने में मदद मिलेगी।
गर्भवती महिलाओं के लिए बेहतर देखभाल
तमिलनाडु का आपातकालीन प्रसूति देखभाल मॉडल उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के लिए कारगर माना जाता है। इसमें हर जिले के कम से कम दो अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर हर समय उपलब्ध रहते हैं।
राजस्थान भी इस मॉडल से प्रेरणा लेकर गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, सुरक्षित प्रसव और एनीमिया कम करने पर विशेष ध्यान देगा।
क्या होगा लाभ
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गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल
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हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को समय पर इलाज
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दूर-दराज के इलाकों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह
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मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी
इन बदलावों से राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत होंगी और आम लोगों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।
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