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राजस्थान के बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में कथित भ्रष्टाचार को लेकर राजनीति तेज हो गई है। इस बार आरोप विपक्ष ने नहीं, बल्कि सत्ताधारी भाजपा के विधायक जेठानंद व्यास ने ही लगाए हैं। उनके बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है।
प्लेसमेंट के नाम पर वसूली का आरोप
एक कार्यक्रम के दौरान विधायक जेठानंद व्यास ने कहा कि अस्पताल में प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए 210 नर्सिंग कर्मचारियों की भर्ती हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस भर्ती में युवाओं से एक-एक लाख रुपये तक लिए गए।
विधायक ने यह भी कहा कि जिन उम्मीदवारों की सिफारिश उन्होंने खुद की थी, उनसे भी पैसे वसूले गए। उन्होंने कहा कि यह युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है और वे भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
विधायक के बयान के बाद कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि जब सत्ताधारी दल का विधायक ही खुद को असहाय महसूस कर रहा है, तो आम जनता का क्या हाल होगा? उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए।
कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन
बीकानेर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और इस मामले की जांच की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।
कैसे हो रही है वसूली?
आरोप है कि अस्पताल में मैनपावर देने वाली एजेंसियां युवाओं को नौकरी का लालच देकर उनसे बड़ी रकम वसूलती हैं। कहा जा रहा है कि 210 पदों के लिए प्रति उम्मीदवार 1 लाख रुपये तक मांगे गए। विधायक ने इशारा किया कि बिना बड़े स्तर की मिलीभगत के इतना बड़ा भ्रष्टाचार संभव नहीं है।
सिफारिश पर भी उठे सवाल
विधायक के बयान से एक और सवाल खड़ा हुआ है। उन्होंने खुद माना कि उन्होंने कुछ उम्मीदवारों की सिफारिश की थी। इससे यह बहस शुरू हो गई है कि क्या नियुक्तियों में सिफारिश करना सही है या मेरिट के आधार पर ही चयन होना चाहिए।
कुल मिलाकर, इस मामले ने राजस्थान की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और अब सभी की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है।
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