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राजस्थान में मंदिरों की देखरेख करने वाला देवस्थान विभाग इस समय स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। विभाग के जिम्मे करीब 900 सरकारी मंदिर, हजारों सार्वजनिक ट्रस्ट और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी व्यवस्थाएं हैं। लेकिन विभाग में 52 प्रतिशत पद खाली होने के कारण कामकाज प्रभावित हो रहा है।
16 साल से नहीं हुआ कैडर रिव्यू
देवस्थान विभाग में 2009 के बाद से कैडर रिव्यू नहीं हुआ है। इसी वजह से कई पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। हालत यह है कि एक अधिकारी को 7 से 8 जिलों का काम संभालना पड़ रहा है, जिससे व्यवस्था पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
मंदिरों की देखरेख पर पड़ रहा असर
स्टाफ की कमी के कारण कई जरूरी काम समय पर नहीं हो पा रहे हैं, जैसे:
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दान पेटियों की राशि का सही हिसाब
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मंदिरों की जमीन और संपत्ति का रिकॉर्ड
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संपत्तियों का सत्यापन और ऑडिट
कई मंदिरों में ऑडिट सालों से लंबित है। कुछ जगह मंदिरों की इमारतें भी जर्जर हो चुकी हैं, जिससे हादसे का खतरा बना हुआ है।
जिम्मेदारियां बढ़ीं, लेकिन स्टाफ नहीं
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोसायटी एक्ट से जुड़े कई संस्थानों की जिम्मेदारी भी देवस्थान विभाग को दी गई है। इसके अलावा सरकार ने 100 से ज्यादा मंदिरों के जीर्णोद्धार और निर्माण का काम भी इसी विभाग को सौंप दिया है।
साथ ही वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना और धार्मिक आयोजनों की जिम्मेदारी भी इसी विभाग के पास है। लेकिन नई जिम्मेदारियों के बावजूद कोई नया अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया।
विभाग से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
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विभाग के 469 स्वीकृत पदों में से 251 पद खाली हैं
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18 साल पहले सार्वजनिक ट्रस्ट की संख्या करीब 6100 थी, जो अब बढ़कर लगभग 13 हजार हो गई है
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कई शिकायतें महीनों तक लंबित रहती हैं
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मंदिरों का निरीक्षण भी नियमित रूप से नहीं हो पा रहा
इन परिस्थितियों में राजस्थान में मंदिरों की देखरेख करने वाला देवस्थान विभाग खुद ही कमजोर व्यवस्था के सहारे चल रहा है।
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