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राजस्थान में यूडी टैक्स वसूली में मनमानी, जबरन थमाए जा रहे नोटिस

राजस्थान की शहरी सरकारें नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) वसूलने के नाम पर मनमानी कर रही हैं। पिछले दो महीनों से मकान और दुकान मालिकों को वर्ष 2007 से टैक्स का भुगतान करने के नोटिस थमाए जा रहे हैं, भले ही उन्होंने हाल ही में संपत्ति खरीदी हो। इस डर से कि मकान या दुकान सील हो जाएगी, कई लोगों ने पुराने बकाया टैक्स का भुगतान कर दिया, लेकिन अतिरिक्त राशि कब वापस मिलेगी, इसकी कोई जानकारी नहीं है।

प्रॉपर्टी सील करने की धमकी देकर टैक्स वसूली

खाली खजाना भरने के लिए व्यापारियों और आम नागरिकों को डराया जा रहा है। निकाय अधिकारी टैक्स जमा करने का दबाव बना रहे हैं और नियमों को ताक पर रखकर जबरन वसूली कर रहे हैं। नगर निगमों में तो कुछ लोगों को एक से डेढ़ करोड़ रुपये तक के नोटिस भी दे दिए गए।

निजी कंपनियों से टैक्स वसूली नियमों के खिलाफ

जयपुर सहित कई नगर निकायों में टैक्स वसूली का काम निजी कंपनियों को सौंप दिया गया है, जो नियमों के खिलाफ है।

  • राजस्थान नगर पालिका अधिनियम के तहत केवल नगर पालिका अधिकारी ही टैक्स वसूल सकते हैं।

  • 2016 की अधिसूचना के अनुसार, टैक्स वसूली निकायों को खुद करनी होती है, निजी एजेंसी केवल रिकॉर्ड संधारण और सर्वे का काम कर सकती है।

  • इसके बावजूद, निजी फर्म के कर्मचारी लोगों से जबरन टैक्स वसूल रहे हैं।

लोग परेशान, पैसा कब वापस मिलेगा?

जयपुर सहित अन्य शहरों में लोग गलत नोटिस मिलने से परेशान हैं। पहले निकायों ने जबरदस्ती टैक्स जमा करवाया, फिर कहा कि बाद में पैसा वापस कर दिया जाएगा। लेकिन कई लोगों को अब तक उनकी राशि वापस नहीं मिली।

कैसे लोगों को परेशान किया जा रहा है?

  1. 2007 से नोटिस देकर टैक्स मांगा जाता है।

  2. लोग रजिस्ट्री और अन्य दस्तावेज दिखाकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हैं, लेकिन समाधान नहीं मिलता।

  3. पैसा वसूल लिया जाता है, लेकिन वापस करने में टालमटोल की जाती है।

उदाहरण:

  • किशन भाटी और सुमित्रा भाटी (जोधपुर) – उन्होंने 2020 में मकान खरीदा, लेकिन यूडी टैक्स 2007 से जोड़कर 75,000 रुपये भरवा लिए गए। अब वे अपनी शेष राशि के लिए चक्कर लगा रहे हैं।

किन संपत्तियों पर लगता है यूडी टैक्स?

आवासीय:

  • 300 वर्ग गज से अधिक

  • 1500 वर्ग फीट से अधिक

व्यावसायिक:

  • 100 वर्ग गज से अधिक

निष्कर्ष

राजस्थान में यूडी टैक्स वसूली के नाम पर मनमानी हो रही है। निजी फर्मों के जरिए जबरन नोटिस थमाए जा रहे हैं और जनता को परेशान किया जा रहा है। टैक्स वसूली को पारदर्शी और नियमों के अनुसार किया जाना चाहिए, ताकि आम जनता को अनावश्यक आर्थिक बोझ से बचाया जा सके।

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