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राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि जो अधिकारी केस की पैरवी में लापरवाही करता है, उसकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) खराब की जाए और जरूरत पड़ने पर जुर्माना भी लगाया जाए।
कोर्ट ने सरकार को दिए सख्त निर्देश
न्यायाधीश अनूप कुमार ढंड ने मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और विभागीय निदेशकों को निर्देश दिया कि वे केस प्रभारी अधिकारियों (OIC) और सरकारी वकीलों की जवाबदेही तय करें। कोर्ट ने 15 अप्रैल तक इस आदेश की पालना रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
2016 से लंबित केस, वकील के पास फाइल ही नहीं!
बद्रीनारायण शर्मा की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नाराजगी जताई कि 2016 से लंबित एक केस में सरकारी वकील को अब तक केस की मूल फाइल ही नहीं दी गई। कोर्ट ने इसे प्रशासनिक विफलता बताया और कहा कि इसी वजह से मामलों में देरी हो रही है।
कोर्ट ने दिए सुधार के सुझाव
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लंबित केसों की सूची तैयार करें: केस प्रभारी अधिकारी एक माह के अंदर अपने सभी लंबित मामलों की सूची बनाकर सरकारी वकीलों को सौंपें।
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जवाबदेही तय हो: केस की सफलता दर को अधिकारी के सेवा रिकॉर्ड में जोड़ा जाए।
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लापरवाही पर दंड मिले: अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित केस मैनेजमेंट सिस्टम बने: जिससे केस की ट्रैकिंग हो सके।
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ऑटोमैटिक डॉक्यूमेंट फाइलिंग सिस्टम: सरकारी वकीलों को समय पर केस की फाइलें मिलें।
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निगरानी डैशबोर्ड: लंबित मामलों पर निगरानी रखने के लिए एक मॉनिटरिंग सिस्टम बने।
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अच्छे प्रदर्शन पर इनाम: जो अधिकारी अच्छा काम करें, उन्हें प्रोत्साहित किया जाए।
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केन्द्रीय मॉनिटरिंग सिस्टम: विभागों में बेहतर समन्वय और मुकदमों की निगरानी के लिए एक केंद्रीकृत सिस्टम लागू हो।
कोर्ट की सख्त चेतावनी
अगर 15 अप्रैल तक इन आदेशों का पालन नहीं हुआ तो कोर्ट ने गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।
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