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जयपुर।
राजस्थान के शिक्षा विभाग में एक अनोखी घटना देखने को मिली है। जयपुर, अलवर, सीकर समेत कई जिलों के 159 शिक्षक पदोन्नति (प्रमोशन) मिलने के बावजूद उसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। आमतौर पर हर कर्मचारी ऊंचे पद तक पहुंचने की ख्वाहिश रखता है, लेकिन यहां कई शिक्षक खुद ही प्रमोशन लेने से इनकार कर रहे हैं।
समृद्ध जिलों के शिक्षक नहीं चाहते प्रमोशन
शेखावाटी अंचल के चुरू, झुंझुनूं, अलवर, भरतपुर, दौसा, करौली, नागौर जैसे जिलों के शिक्षकों ने पदोन्नति ठुकरा दी। शिक्षा विभाग ने सूची जारी कर बताया कि कई शिक्षकों ने पदोन्नत पदों पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया, न ही शाला दर्पण पोर्टल पर अपडेट किया। कुछ ने तो लिखित में प्रमोशन लेने से मना कर दिया।
प्रमोशन छोड़ने की प्रमुख वजहें
1️⃣ स्थान परिवर्तन का डर – प्रमोशन के बाद नई जगह जाना पड़ेगा।
2️⃣ स्थायी निवास छूटने का डर – कई शिक्षक सालों से एक ही जगह पर कार्यरत हैं और वहां से जाना नहीं चाहते।
3️⃣ वित्तीय लाभ कम – प्रमोशन से तनख्वाह में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी।
4️⃣ पारिवारिक और निजी जिम्मेदारियां – परिवार से दूर नहीं जाना चाहते।
5️⃣ अधिक प्रशासनिक जिम्मेदारी – प्रमोशन के बाद काम का दबाव बढ़ेगा, जिससे बचना चाहते हैं।
किन जिलों के कितने शिक्षकों ने प्रमोशन ठुकराया?
📌 जयपुर – 43 शिक्षक
📌 अलवर – 18 शिक्षक
📌 सीकर – 11 शिक्षक
📌 नागौर – 11 शिक्षक
📌 झुंझुनूं – 09 शिक्षक
📌 चूरू – 08 शिक्षक
📌 जोधपुर – 06 शिक्षक
📌 उदयपुर – 04 शिक्षक
क्या कहता है शिक्षा विभाग?
शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों के प्रमोशन ठुकराने को स्वीकार कर लिया है। हालांकि, यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर शिक्षक प्रमोशन क्यों नहीं चाहते?
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