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राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बांटे जा रहे सैनेटरी नैपकिन के निस्तारण के लिए एक राज्य स्तरीय नीति तैयार कर ली है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस नीति के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है। अब बजट की मंजूरी के बाद इस पर काम शुरू होगा। पहले चरण में बस्सी ब्लॉक से पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा, जिस पर 3 से 4 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में निगरानी समिति बनेगी
इस योजना के सही तरीके से लागू होने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के महिला अधिकारिता विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति बनेगी, जो हर 6 महीने में प्रगति की समीक्षा करेगी। इसके अलावा नगर निगम, शहरी विकास विभाग, पंचायती राज विभाग, स्वच्छ भारत मिशन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे विभागों की भी इसमें भूमिका होगी।
रीयूजेबल उत्पादों को बढ़ावा
नीति में इस बात पर जोर दिया गया है कि जितना संभव हो, रीयूजेबल यानी दोबारा उपयोग में लाए जा सकने वाले उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ाया जाए। जैसे कि मेन्स्ट्रुअल कप और कपड़े के पुनः उपयोग वाले डायपर। इसके लिए महिलाओं और लड़कियों को जागरूक किया जाएगा।
निस्तारण की दो व्यवस्थाएं – ऑनसाइट और ऑफसाइट
सैनेटरी नैपकिन के कचरे को दो तरह से निस्तारित किया जाएगा:
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ऑफसाइट: यानी बाहर भेजकर निस्तारण – इसके लिए बायोमेडिकल इंसिनरेटर, रीसाइक्लिंग तकनीक और वेस्ट टू एनर्जी तकनीक का उपयोग होगा।
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ऑनसाइट: यानी मौके पर ही निस्तारण – दूर-दराज के इलाकों में जहां अन्य व्यवस्था नहीं हो सकती, वहां गहरे गड्ढों (डीप बरियल पिट्स) का इस्तेमाल किया जाएगा।
इस नीति से राज्य में महिला स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
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