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राजस्थान में परिवहन विभाग और निजी बस संचालकों के बीच विवाद बढ़ गया है। बस ऑपरेटर एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर 23 फरवरी तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो पूरे प्रदेश में निजी बसों का चक्का जाम किया जाएगा। इस हड़ताल से गांवों से लेकर दिल्ली, गुजरात, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों तक बस सेवा प्रभावित होगी।
सरकार पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप
बस ऑपरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष सत्यनारायण साहू ने कहा कि परिवहन विभाग सिर्फ निजी बसों पर सख्ती कर रहा है। उनका आरोप है कि इमरजेंसी गेट न होने के नाम पर निजी बसों को तुरंत जब्त कर लिया जाता है, जबकि सरकारी बसों पर ऐसी कार्रवाई नहीं होती।
12 लाख यात्रियों पर असर
इस हड़ताल से रोजाना करीब 12 लाख यात्रियों को परेशानी हो सकती है।
लगभग 22 हजार कॉन्ट्रैक्ट कैरिज और 8 हजार स्टेज कैरिज बसें हड़ताल में शामिल होंगी। यानी कुल 30 हजार बसों का संचालन बंद रहेगा।
ग्रामीण इलाकों में जहां बसें ही मुख्य साधन हैं, वहां लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत होगी।
बसों को सीज करने पर नाराजगी
बस संचालकों का कहना है कि नियम उल्लंघन पर चालान काटा जा सकता है, लेकिन बसों को मौके पर सीज करना और आरसी निलंबित करना गलत है। उनका आरोप है कि कुछ नियमों का गलत इस्तेमाल कर 20 साल पुरानी वैध दस्तावेज वाली बसों पर भी कार्रवाई की जा रही है।
बीच रास्ते में कार्रवाई से परेशानी
ऑपरेटरों का कहना है कि आरटीओ कई बार बसों को बीच रास्ते में जब्त कर लेता है। इससे यात्रियों को सुनसान जगहों पर उतरना पड़ता है और उन्हें भारी परेशानी होती है। इससे पर्यटन व्यवसाय को भी नुकसान पहुंच रहा है।
बॉडी कोड को लेकर विवाद
संचालकों ने कहा कि जिन बसों का पंजीकरण सभी जांच के बाद किया गया था, अब उन्हीं बसों को बॉडी कोड के नाम पर गलत बताया जा रहा है। उनका सवाल है कि जब विभाग ने पहले बसों को पास किया था, तो अब उन्हें गलत कैसे बताया जा सकता है।
कुल मिलाकर, यदि समझौता नहीं हुआ तो 23 फरवरी से प्रदेश में बड़ी बस हड़ताल देखने को मिल सकती है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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