Related Articles
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार, 3 अप्रैल को अपनी सोशल मीडिया सीरीज ‘इंतज़ारशास्त्र’ का 12वां चैप्टर जारी किया। इस बार उनका निशाना जयपुर के कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान पर था।
क्लब का मकसद और सुविधाएं
- यह क्लब दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया की तर्ज पर बनाया गया था।
- क्लब में आधुनिक ऑडिटोरियम, मीटिंग हॉल, कॉफी शॉप, लग्जरी जिम, रेस्टोरेंट और वीआईपी गेस्ट रूम जैसी सुविधाएं हैं।
- उद्देश्य: राजस्थान के बुद्धिजीवियों और जनप्रतिनिधियों के लिए एक साझा मंच तैयार करना, जहां वे लोकतांत्रिक चर्चा कर सकें।
गहलोत के तीन तीखे सवाल
- देरी का कारण: निर्माण पूरा होने के बाद भी क्लब लगभग एक साल तक बंद क्यों रखा गया?
- पारदर्शिता पर सवाल: अब जब क्लब खोला गया है, सदस्यता प्रक्रिया पारदर्शी और सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
- डर का माहौल: क्या सरकार को डर है कि यहां लोकतांत्रिक संवाद से उनकी कमियां सामने आएंगी?
जनता के पैसे की बर्बादी
- गहलोत ने कहा कि क्लब जनता के पैसे से बना है।
- इसे केवल इसलिए उपेक्षित रखना कि इसे कांग्रेस सरकार ने बनवाया था, गलत और अस्वीकार्य है।
- उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों की अनदेखी और सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।
राजस्थान की बौद्धिक विरासत पर प्रभाव
- गहलोत के अनुसार, क्लब सिर्फ इमारत नहीं, बल्कि राजस्थान की बौद्धिक विरासत है।
- इसे बंद रखना या सीमित लोगों तक सीमित करना प्रदेश के लोकतंत्र को कमजोर करता है।
- इस मुद्दे ने अब जयपुर के राजनीतिक गलियारों और साहित्यकारों, पत्रकारों के बीच भी गहन चर्चा शुरू कर दी है।
CHANNEL009 Connects India
