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राजस्थान विधानसभा में मंत्री अविनाश गहलोत की टिप्पणी पर बवाल

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को ‘आपकी दादी’ कहने पर कांग्रेस का विरोध

राजस्थान बजट सत्र 2025: राजस्थान विधानसभा में शनिवार को बजट सत्र के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर की गई टिप्पणी को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने एक योजना का जिक्र करते हुए उसे ‘आपकी दादी’ की योजना कहा। इस बयान से कांग्रेस नाराज हो गई और सदन में विरोध करने लगी।

मंत्री अविनाश गहलोत ने क्या कहा?

विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि 2023-24 के बजट में हमेशा की तरह ‘आपकी दादी’ इंदिरा गांधी के नाम पर इस योजना का नाम रखा गया था। इस पर कांग्रेस ने नाराजगी जताई और इसे इंदिरा गांधी का अपमान बताया।

कांग्रेस का विरोध और वॉकआउट

कांग्रेस नेता टीकाराम जूली और प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मंत्री के बयान पर आपत्ति जताई। टीकाराम जूली ने कहा कि इंदिरा गांधी सिर्फ कांग्रेस की नेता नहीं थीं, बल्कि देश की प्रधानमंत्री थीं। उनके लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना गलत है।
गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार खुद सदन में हंगामा करवाना चाहती है और कांग्रेस इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

सदन की कार्यवाही स्थगित

कांग्रेस विधायकों के विरोध के कारण सदन में जोरदार हंगामा हुआ। बढ़ते विवाद को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सुबह 11:36 बजे सदन की कार्यवाही 30 मिनट के लिए स्थगित कर दी। दोबारा 12:36 बजे कार्यवाही शुरू हुई, लेकिन हंगामा जारी रहा, जिससे दोपहर 2:00 बजे तक सदन को फिर से स्थगित करना पड़ा।

सरकार ने किया बचाव

संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने मंत्री अविनाश गहलोत का बचाव करते हुए कहा कि ‘दादा, नाना, मामा, नानी’ जैसे शब्द सम्मान के लिए बोले जाते हैं। जब महात्मा गांधी को ‘दादा’ कहा जा सकता है, तो इंदिरा गांधी को ‘दादी’ कहना भी गलत नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर जानबूझकर हंगामा करने का आरोप लगाया।

कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

विधानसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार और स्पीकर पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मंत्री ने जानबूझकर इंदिरा गांधी को ‘आपकी दादी’ कहा ताकि कांग्रेस को उकसाया जा सके। यह संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने मांग की कि मंत्री का बयान कार्यवाही से हटाया जाए, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया।

इस पूरे घटनाक्रम से विधानसभा का माहौल गरम हो गया और कांग्रेस व बीजेपी के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

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