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राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में अब तक करीब 9,800 सवाल पूछे गए हैं। इनमें से केवल 516 सवालों को प्रश्नकाल में चर्चा के लिए चुना गया, लेकिन सिर्फ 288 सवालों पर ही बहस हो पाई। इसमें भी महत्वपूर्ण प्रदेश स्तरीय मुद्दों से जुड़े सिर्फ 40 सवाल थे।
ज्यादातर विधायक अपने क्षेत्रों तक सीमित
चौंकाने वाली बात यह है कि 200 विधायकों में से केवल 30 ने ही प्रदेश स्तर के सवाल उठाए, बाकी विधायक सिर्फ अपने क्षेत्रीय मुद्दों तक सीमित रहे।
क्या हैं मुख्य समस्याएं?
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ज्यादातर सवाल स्थानीय योजनाओं, बजट खर्च और क्षेत्रीय समस्याओं से जुड़े हैं।
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प्रदेश के बड़े विकास मुद्दों पर गंभीर चर्चा नहीं हो रही।
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सरकार को जवाबदेह बनाने और विकास को गति देने का दबाव कम हो रहा है।
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महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों पर बहस का अवसर भी घट रहा है।
राज्य के विकास के लिए व्यापक सोच जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश की प्रगति के लिए विधायकों को बड़े मुद्दों पर सवाल उठाने चाहिए।
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रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, जल संकट, उद्योग, बुनियादी ढांचा जैसे विषयों पर चर्चा होनी चाहिए।
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इससे सरकार को जवाबदेह बनाया जा सकता है और राज्य की दिशा तय करने में मदद मिलेगी।
ये थे कुछ प्रमुख प्रदेश स्तरीय सवाल:
✅ शिक्षा: निजी स्कूलों में RTE के तहत प्रवेश
✅ पर्यावरण: भूजल स्तर बढ़ाने की योजना, वन क्षेत्र में वृद्धि
✅ स्वास्थ्य: सफाईकर्मियों की भर्ती, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में पद सृजन
✅ रोजगार: बेरोजगारों को रोजगार, संविदा कर्मियों का स्थायीकरण
✅ कृषि: फसल बीमा क्लेम भुगतान, खरीफ-रबी फसलों की MSP पर खरीद
✅ जल संकट: रावी-व्यास नदी से पानी लाने की योजना, अटल भूजल योजना
✅ सुरक्षा: साइबर अपराधों पर नियंत्रण, हत्या व अपहरण के मामलों की स्थिति
✅ योजनाएं: लखपति दीदी योजना, सहकार जीवन सुरक्षा बीमा
✅ अनियमितताएं: भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी की जांच, बजरी का अवैध खनन
निष्कर्ष:
यदि विधायक केवल अपने क्षेत्रों तक सीमित रहेंगे, तो राज्य के विकास को गति देना मुश्किल होगा। प्रदेश स्तरीय मुद्दों पर ज्यादा चर्चा होनी चाहिए ताकि जनहित में ठोस फैसले लिए जा सकें।
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