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राजस्थान में एक 75 साल के दंपत्ति के तलाक के मामले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तलाक देने से इंकार करते हुए कहा कि जीवन के अंतिम पड़ाव में संपत्ति विवाद या सामान्य पारिवारिक मतभेद के आधार पर 50 साल से ज्यादा पुराने विवाह को खत्म नहीं किया जा सकता।
1967 में हुई थी शादी
इस मामले में पति, जो एक सेवानिवृत्त स्कूल प्रिंसिपल हैं, ने 2014 में पारिवारिक न्यायालय में तलाक की याचिका दायर की थी। उनकी शादी 29 जून 1967 को हुई थी। दंपत्ति के दो बेटे और एक बेटी हैं, जिनकी शादी हो चुकी है।
46 साल तक नहीं हुआ कोई बड़ा विवाद
कोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी ने करीब 46 साल तक साथ जीवन बिताया और इस दौरान किसी गंभीर विवाद की शिकायत सामने नहीं आई। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत तलाक के लिए क्रूरता का ठोस आधार जरूरी होता है, जो इस मामले में साबित नहीं हुआ।
संपत्ति विवाद बना कारण
पति-पत्नी के बीच संपत्ति बंटवारे को लेकर मतभेद हो गया था। पति चाहता था कि संपत्ति दोनों बेटों में बराबर बांटी जाए, जबकि पत्नी बड़े बेटे को देने के पक्ष में थी। इसी विवाद के बाद मामला कोर्ट तक पहुंचा।
दहेज प्रताड़ना का आरोप
2014 में पत्नी ने दहेज प्रताड़ना और मारपीट का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने बाद में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। पति ने पत्नी पर देखभाल नहीं करने का आरोप लगाया, वहीं पत्नी ने कहा कि एक महिला को घर लाने के विरोध पर उसे घर से बाहर कर दिया गया।
कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि लंबे वैवाहिक जीवन में छोटे-मोटे मतभेद सामान्य हैं। ऐसे मामलों को क्रूरता नहीं माना जा सकता। संपत्ति का विवाद 58 साल पुराने रिश्ते को तोड़ने का पर्याप्त कारण नहीं है।
इस तरह कोर्ट ने तलाक की अपील खारिज कर दी।
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