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रायपुर। शहर में अब सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से व्यावहारिक प्रतिबंध लगाया जाएगा। इसके लिए एनजीओ की मदद से लोगों को जागरूक किया जाएगा और प्लास्टिक के उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण किया जाएगा। यह जानकारी महापौर मीनल चौबे ने गुरुवार को प्रेसवार्ता में दी।
इंदौर मॉडल को अपनाएगा रायपुर
महापौर ने बताया कि इंदौर में सीखे गए अनुभवों को रायपुर में अपनाया जाएगा, ताकि स्वच्छता व्यवस्था को नई दिशा मिल सके। शहर के सभी 10 जोनों में RRR (Reuse, Reduce, Recycle) केंद्र बनाए जाएंगे और इनका संचालन एनजीओ की मदद से किया जाएगा।
कचरा प्रबंधन पर खास जोर
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सभी घरों से डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन किया जाएगा।
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सफाई वाहनों की ट्रैकिंग के लिए 20 लोगों की टीम बनाई जाएगी।
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उप अभियंताओं को सफाई कार्य की निगरानी का जिम्मा दिया जाएगा।
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ठेकेदार कंपनियों पर निगरानी के लिए एक खास टास्क फोर्स बनाई जाएगी।
कचरा ट्रांसफर स्टेशन और वार्ड मैपिंग
महापौर ने बताया कि हर वार्ड का नक्शा तैयार किया जा रहा है, जिसमें सड़क, नाला-नाली, पार्क, तालाब, सरकारी इमारतें, कॉलोनियां, स्ट्रीट लाइट आदि की जानकारी शामिल होगी।
साथ ही, हर जोन में नए ट्रांसफर स्टेशन और सेकेंडरी कलेक्शन पॉइंट बनाए जाएंगे।
इंदौर मॉडल की खास बातें:
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कचरे को 6 प्रकार में अलग किया जाता है।
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घर-घर से कचरा इकट्ठा कर सीधे प्रोसेसिंग प्लांट भेजा जाता है।
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गीले कचरे से खाद बनाई जाती है।
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नालियां ढकी होती हैं, जिससे कचरा नहीं जाता।
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पुरानी वस्तुएं जरूरतमंदों को दी जाती हैं (RRR केंद्र के माध्यम से)।
रोजाना सफाई निरीक्षण की अपील
नगर निगम सभापति सूर्यकांत राठौड़ ने भी सभी पार्षदों से अपील की है कि वे हर दिन सुबह सफाई व्यवस्था का निरीक्षण करें और कमियों को तुरंत सुधारें।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन ठेकेदारों ने कार्यादेश के बावजूद काम पूरा नहीं किया है, उनके खिलाफ ठेका निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष: रायपुर नगर निगम अब सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह रोक लगाने और इंदौर की तर्ज पर सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में काम कर रहा है। इससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था और भी बेहतर होने की उम्मीद है।
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