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मीडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और पिछले करीब 14 दिनों से चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ा है। इसी दौरान कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।
हालांकि अब अमेरिका ने सभी देशों को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दे दी है। इस फैसले के बाद तेल की कीमतों में हल्की गिरावट देखने को मिली है।
आज का क्रूड ऑयल भाव
आज सुबह लगभग 7:15 बजे तेल बाजार में:
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ब्रेंट क्रूड करीब 99.99 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जिसमें करीब 0.47% की गिरावट आई।
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वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) करीब 95.09 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जिसमें लगभग 0.67% की कमी दर्ज हुई।
क्यों दी गई तेल खरीदने की छूट
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बताया कि वैश्विक तेल आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया है। इसके तहत अब दूसरे देश भी समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीद सकते हैं।
हालांकि इस फैसले से रूस को बहुत बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होगा, क्योंकि उसे सबसे ज्यादा आय तेल उत्पादन स्थानों पर लगाए गए टैक्स से मिलती है।
इससे पहले अमेरिका ने 5 मार्च से भारत को जहाजों में लदे रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दी थी। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं में कुछ राहत मिली।
अमेरिका की अर्थव्यवस्था को हो सकता है फायदा
अमेरिकी सरकार का मानना है कि तेल की कीमतों में यह बढ़ोतरी अस्थायी है। ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने वाली नीतियों के कारण अमेरिका में तेल और गैस का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिससे भविष्य में अर्थव्यवस्था को फायदा मिल सकता है।
चीन के बाजार पर असर क्यों कम
तेल की कीमत बढ़ने से आमतौर पर तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर दबाव पड़ता है। लेकिन इस बार चीन पर इसका असर कम दिखाई दे रहा है।
27 फरवरी के बाद:
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दक्षिण कोरिया का बाजार लगभग 10% गिरा
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भारतीय बाजार करीब 6.45% गिरा
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जबकि चीन के बाजार में केवल 0.49% गिरावट दर्ज हुई।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में चीन ने स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में बड़ा निवेश किया है। इससे उसकी आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हुई है, इसलिए तेल की कीमतों का असर वहां अपेक्षाकृत कम पड़ा है।
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