लंदन:
एक महिला ने दावा किया है कि उन्हें लंदन अंडरग्राउंड की एलिज़ाबेथ लाइन में सफर के दौरान एक अज्ञात महिला द्वारा एक “डेविल्स ब्रीथ” नामक खतरनाक नशे की दवा से निशाना बनाया गया। इस ड्रग को “मेमोरी-इरेजिंग” यानी याद्दाश्त मिटाने वाली दवा के रूप में जाना जाता है।
डेबोरा ऑस्कर, जो एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, ने बताया कि यह घटना 17 जून को घटी, जब वह एक खाली डिब्बे में अकेली यात्रा कर रही थीं। तभी एक महिला ने अखबार लहराते हुए उनकी ओर रुख किया और पास में आकर बैठ गई।
“वह महिला बार-बार मेरी तरफ देख रही थी। मुझे लगा वह कोई टूरिस्ट है जो शायद रास्ता पूछना चाहती है, लेकिन उसने बिना कुछ कहे सीधे आंखों में आंखें डालकर मुझे देखा,” डेबोरा ने कहा।
कुछ ही पलों में महसूस हुआ नशा
ऑस्कर ने बताया कि जैसे ही वह महिला पास आकर बैठी, उन्हें अचानक गहरी नींद और नशे जैसा महसूस होने लगा।
“मेरे शरीर में अजीब सा सुकून और थकावट महसूस हुई, जैसे मेरी चेतना जा रही हो। पहले तो लगा शुगर लो हो रही है, लेकिन तभी मुझे सोशल मीडिया पर देखे गए ‘Devil’s Breath’ ड्रग के वीडियो याद आ गए,” उन्होंने कहा।
संदिग्ध पुरुषों से सामना और डरावनी स्थिति
संभवतः खुद को खतरे में महसूस करते हुए, डेबोरा ने डिब्बा बदला। लेकिन दूसरे डिब्बे में उन्हें दो अनजान पुरुष दिखे, जो न केवल उन्हें घूर रहे थे बल्कि एक-दूसरे को भी देख रहे थे — जैसे उन्हें एक-दूसरे की पहचान हो।
“मैं अगले स्टेशन पर उतर गई। जब मैं बाहर निकली तो मैंने देखा कि वो दोनों आदमी एक-दूसरे की तरफ देख रहे थे — मुझे तब यकीन हो गया कि वे आपस में जुड़े हुए हैं।”
लोगों को किया सतर्क
डेबोरा ने कहा कि उन्हें शक है कि यह एक संगठित अपराध का हिस्सा हो सकता है और इस तरह के हमले नई क्राइम ट्रेंड का संकेत हो सकते हैं।
“लंदन जैसी भीड़-भाड़ वाली जगह ऐसे हमलों के लिए आसान निशाना बन सकती है। इसलिए मैं चाहती हूं कि लोग सतर्क रहें और इस तरह की किसी भी असामान्य हरकत को नजरअंदाज न करें।”
क्या है ‘Devil’s Breath’?
‘डेविल्स ब्रीथ’ का असली नाम स्कोपोलामिन (Scopolamine) है, जिसे वैज्ञानिक रूप से हायोसीन (Hyoscine) कहा जाता है। यह एक शक्तिशाली इनहेल करने वाली एनेस्थेटिक दवा है जिसका उपयोग चिकित्सा में किया जाता है, लेकिन इसकी गलत उपयोग क्षमता के कारण यह अपराधियों के लिए एक खतरनाक हथियार बन चुका है।
इस ड्रग की थोड़ी सी मात्रा ही व्यक्ति को मानसिक रूप से असहाय बना सकती है, जिससे वह लूटपाट या अन्य अपराधों के लिए आसान लक्ष्य बन जाता है।
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