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लखनऊ में 25वें अंतरराष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन का भव्य आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस सम्मेलन का उद्घाटन सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (सीएमएस) के वर्ल्ड यूनिटी कन्वेंशन सेंटर में किया। इस कार्यक्रम में 56 देशों के 178 मुख्य न्यायाधीश और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ और भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 को विश्व शांति और सह-अस्तित्व के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि यह अनुच्छेद अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सम्मान और संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान बढ़ावा देता है। उन्होंने भारत के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के आदर्श को वैश्विक मानवता के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।
भारत का शाश्वत संदेश
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत ने हमेशा शांति, सौहार्द और सह-अस्तित्व को प्राथमिकता दी है। उन्होंने संविधान अंगीकरण के 75 वर्ष पूरे होने के मौके को प्रेरणादायक बताया और कहा कि यह सम्मेलन न्याय, शांति और विकास की दिशा में एक प्रभावशाली मंच है।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘समिट ऑफ दि फ्यूचर’ में दिए गए संदेश को दोहराते हुए कहा कि युद्ध समस्याओं का समाधान नहीं है। यह बच्चों के भविष्य को खतरे में डालता है।
डॉ. जगदीश गांधी को श्रद्धांजलि
योगी आदित्यनाथ ने सीएमएस के संस्थापक डॉ. जगदीश गांधी को श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनकी दूरदृष्टि ने इस सम्मेलन को एक अंतरराष्ट्रीय मंच बना दिया है। उन्होंने डॉ. भारती गांधी और गीता गांधी किंगडन को भी आयोजन को सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया।
वैश्विक उपस्थिति और सहयोग का प्रतीक
सम्मेलन में हंगरी की पूर्व राष्ट्रपति, हैती के पूर्व प्रधानमंत्री, स्कूली छात्र, अभिभावक और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस आयोजन को वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए भारत के योगदान का प्रतीक बताया गया।
यह सम्मेलन न केवल अंतरराष्ट्रीय न्याय और शांति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुरक्षित और शांतिपूर्ण दुनिया बनाने का संदेश भी देता है।
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