सियोल:
दक्षिण कोरिया की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है — ली जे-म्यांग ने देश के राष्ट्रपति पद की कमान संभाल ली है। अपने लोकलुभावन रवैये और प्रगतिशील सोच के लिए पहचाने जाने वाले ली के सामने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई नाजुक मोर्चे खुल चुके हैं। उन्हें अपने नेतृत्व कौशल से देश को नई दिशा देनी होगी।
🇰🇵 उत्तर कोरिया के साथ संबंध: खतरे और कूटनीति की दोधारी तलवार
उत्तर कोरिया के साथ रिश्ते दक्षिण कोरिया की सबसे संवेदनशील विदेश नीति चुनौती रहे हैं। लगातार मिसाइल परीक्षण और परमाणु कार्यक्रम को देखते हुए, ली जे-म्यांग को संवाद और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना होगा। उन्होंने अब तक उत्तर कोरिया के साथ फिर से वार्ता शुरू करने की इच्छा जाहिर की है — लेकिन यह राह आसान नहीं होगी।
🇺🇸🇨🇳 अमेरिका-चीन के बीच कूटनीतिक संतुलन
दक्षिण कोरिया के लिए अमेरिका सुरक्षा का मजबूत साझेदार है, वहीं चीन सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार। इन दोनों के बीच बढ़ते तनाव के बीच ली को दोनों से संबंध बनाए रखते हुए राष्ट्रहित को प्राथमिकता देनी होगी। अपने पहले भाषणों में उन्होंने अमेरिका और जापान के साथ त्रिपक्षीय सहयोग बढ़ाने के संकेत दिए हैं।
⚖️ राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने की चुनौती
पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल की विदाई के बाद देश में स्थायित्व की उम्मीद जगी है। हालांकि, दक्षिण कोरिया का इतिहास बताता है कि सत्ता परिवर्तन हमेशा सहज नहीं रहा। ली के सामने संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती और तख्तापलट जैसे डर को खत्म करने की जिम्मेदारी है। उन्होंने अपने शुरुआती बयानों में लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया है।
💼 आर्थिक असमानता और युवा बेरोजगारी
दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था तकनीक और निर्यात पर आधारित है, लेकिन समाज में धनी और गरीब के बीच खाई बढ़ रही है। खासकर युवा वर्ग में बेरोजगारी चिंता का विषय है। ली को ऐसी नीतियां बनानी होंगी जो रोजगार सृजन, स्टार्टअप्स को बढ़ावा और मध्यम वर्ग के सशक्तिकरण पर केंद्रित हों।
🏠 महंगे घर और बढ़ती जीवन-यापन की लागत
सियोल जैसे शहरों में मकानों की कीमतें आसमान छू रही हैं। युवा और मध्यम वर्ग के लिए आवास एक सपना बनता जा रहा है। ली को सस्ती और सुलभ आवास नीति लानी होगी ताकि आम लोग घर खरीद सकें और किराया नियंत्रण में रहे।
🔍 भ्रष्टाचार पर सख्ती और प्रशासनिक पारदर्शिता
दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपतियों तक को भ्रष्टाचार के मामलों में सज़ा मिल चुकी है। ऐसे माहौल में ली जे-म्यांग से ईमानदार और जवाबदेह शासन की उम्मीद की जा रही है। न्याय व्यवस्था में आम जनता का भरोसा लौटाना उनके कार्यकाल का एक अहम लक्ष्य होगा।
🌏 जलवायु परिवर्तन और अक्षय ऊर्जा
जलवायु संकट दक्षिण कोरिया के लिए भी उतना ही गंभीर है जितना दुनिया के बाकी हिस्सों के लिए। ली को हरित ऊर्जा, क्लीन टेक्नोलॉजी और दीर्घकालिक पर्यावरणीय रणनीतियों पर जोर देना होगा।
🗳️ राजनीतिक ध्रुवीकरण को कम करना
देश की राजनीति में बढ़ती खाई, ध्रुवीकरण और विपक्ष के साथ टकराव की स्थिति को समाप्त कर, राष्ट्रीय एकता बनाए रखना भी ली के नेतृत्व की परीक्षा लेगा।
🔚 निष्कर्ष
ली जे-म्यांग ऐसे समय में सत्ता में आए हैं जब दक्षिण कोरिया को संतुलित, साहसी और पारदर्शी नेतृत्व की सख्त ज़रूरत है। आने वाले वर्ष तय करेंगे कि क्या वह देश को स्थिरता, समावेश और विकास की दिशा में ले जा पाएंगे।
CHANNEL009 Connects India
