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राज्यसभा में गरमागर्मी
गुरुवार को वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में तीखी बहस हुई। इस बहस में गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के बीच जमकर तकरार हुई।
सुधांशु त्रिवेदी का बयान और विवाद
चर्चा के दौरान सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि सरकार ने मुस्लिम समाज के हर वर्ग को प्रतिनिधित्व देने का काम किया है। उन्होंने ताजमहल पर वक्फ बोर्ड के दावे का जिक्र किया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल को वक्फ संपत्ति साबित करने के लिए शाहजहां के समय का दस्तावेज मांगा।
अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी का नाम आने से बढ़ा विवाद
सुधांशु त्रिवेदी ने इशरत जहां, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी के नाम लिए, जिससे एनसीपी सांसद फौजिया खान ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह बयान मुस्लिम समाज का अपमान करता है और इसे हटाया जाना चाहिए। इस पर सभापति जगदीप धनखड़ ने फौजिया खान से पूरी बात समझने को कहा। इस दौरान कांग्रेस के नेता भी विरोध जताने लगे, जिस पर त्रिवेदी ने कहा, “आपने उड़ता तीर क्यों ले लिया?”
अमित शाह की एंट्री और कांग्रेस पर हमला
इसी दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा में हिस्सा लिया और कहा कि एनसीपी ने इशरत जहां को शहीद बताया था, जबकि अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी भी विपक्षी गठबंधन (INDI Alliance) से जुड़े थे।
दिग्विजय सिंह और 26/11 का विवाद
अमित शाह ने दिग्विजय सिंह से 26/11 मुंबई हमले को लेकर दिए गए बयान पर सफाई देने को कहा। उन्होंने कहा, “आप माइक चालू करें और कह दें कि आपने नहीं कहा था कि 26/11 में संघ का हाथ था।”
इस पर दिग्विजय सिंह ने जवाब दिया, “मैं इस बात का खंडन करता हूं।”
गुजरात दंगों पर बहस
दिग्विजय सिंह ने कहा कि गुजरात दंगों के समय अमित शाह गृह मंत्री थे, उनकी क्या भूमिका थी?
इस पर अमित शाह ने पलटवार किया और कहा, “जब दंगे हुए, तब मैं गृह मंत्री नहीं था। लेकिन आपको हर जगह मेरा ही चेहरा दिखता है।”
नतीजा
राज्यसभा में वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान माहौल काफी गर्म रहा, और पक्ष-विपक्ष के नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
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