महिला मुक्केबाजों को अब अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलने से पहले जेंडर टेस्ट कराना अनिवार्य होगा। यह नियम 4 से 14 सितंबर 2025 के बीच इंग्लैंड में होने वाली वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप से लागू होगा। गुरुवार को वर्ल्ड बॉक्सिंग ने इसका ऐलान किया।
नियम के अनुसार खिलाड़ियों का परीक्षण पॉलिमरेज चेन रिएक्शन (PCR टेस्ट) या इसी तरह के जेनेटिक स्क्रीनिंग टेस्ट के जरिए किया जाएगा। इस जांच का मकसद जन्म के समय खिलाड़ी का लिंग पहचानना होगा। इसके लिए Y क्रोमोसोम की मौजूदगी या अनुपस्थिति देखी जाएगी।
वर्ल्ड बॉक्सिंग के अध्यक्ष बोरिस वैन डेर वोर्स्ट ने कहा,
“हम हर खिलाड़ी की गरिमा का सम्मान करते हैं और चाहते हैं कि बॉक्सिंग एक समावेशी खेल बना रहे। लेकिन, यह भी हमारी जिम्मेदारी है कि खिलाड़ियों की सुरक्षा और खेल में निष्पक्षता बनी रहे।”
21 दिन पहले इसी तरह का नियम एथलेटिक्स में लागू किया गया था। 30 जुलाई 2025 को वर्ल्ड एथलेटिक्स काउंसिल ने घोषणा की थी कि जो महिला खिलाड़ी जेंडर टेस्ट नहीं देंगी, वे वर्ल्ड रैंकिंग इवेंट्स में हिस्सा नहीं ले पाएंगी।
यह नियम 1 सितंबर 2025 से लागू होगा। 13 सितंबर से टोक्यो में शुरू होने वाली वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सभी महिला खिलाड़ियों को यह टेस्ट पास करना होगा।
1. अल्जीरिया की इमान खलीफ ने जून 2025 में नीदरलैंड में हुए वर्ल्ड बॉक्सिंग टूर्नामेंट में भाग लेने से इनकार कर दिया था। उन्होंने यह कदम तब उठाया, जब वर्ल्ड एथलेटिक्स ने पहली बार इस तरह के टेस्ट का प्रस्ताव रखा था।
2. ताइवान की लिन यू टिंग (66 किग्रा), जिन्होंने पेरिस ओलंपिक 2024 में गोल्ड मेडल जीता था, उन्हें जेंडर टेस्ट में फेल होने पर 2023 में इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन ने बैन कर दिया।
इन्हीं दोनों खिलाड़ियों को भारत में हुई वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2023 के फाइनल मुकाबलों में भी उतरने से रोक दिया गया था।
पिछले साल पेरिस ओलंपिक 2024 के दौरान भी महिला बॉक्सिंग में जेंडर विवाद ने तूल पकड़ा था। उस समय अल्जीरिया की मुक्केबाज इमान खलीफ पर पुरुष होने के आरोप लगे थे। उनकी विरोधी खिलाड़ी ने मुकाबला खेलने से इनकार कर दिया और कहा कि, “मुझे पुरुष खिलाड़ी के खिलाफ उतार दिया गया है।”
अब बॉक्सिंग और एथलेटिक्स दोनों में ही महिला खिलाड़ियों के लिए जेंडर टेस्ट जरूरी हो गया है। इसका उद्देश्य खेल को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाना बताया जा रहा है, लेकिन कई खिलाड़ियों और खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियम खिलाड़ियों की निजता और करियर को प्रभावित कर सकता है।
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