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जयपुर स्थित प्रदेश मुख्यालय में भारतीय जनता पार्टी के 47वें स्थापना दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कार्यकर्ताओं को पार्टी की निष्ठा और मूल विचारधारा का पाठ पढ़ाया। उनका संबोधन सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
वसुंधरा राजे के भाषण की 10 मुख्य बातें
- पार्टी को मां समझें, पद को भूलें
कार्यकर्ताओं को कहा कि पार्टी को अपनी मां मानें। केवल काम करें, पद की चिंता न करें। - सब कुछ नेतृत्व पर न छोड़ें
पीएम मोदी मजबूत हाथ में हैं, लेकिन संगठन की जिम्मेदारी सबकी है। - दल बदलने वालों से सावधान
संगठन को खतरा दलबदलुओं से है। जिम्मेदारियां केवल निष्ठावान और पुराने कार्यकर्ताओं को मिलनी चाहिए। - अटल जी का ‘चिमटा’ सिद्धांत
सत्ता के लिए किसी को भी तोड़ना पड़े तो मूल कार्यकर्ताओं के सम्मान को नहीं छेड़ा जाए। - हार की संभावना के बावजूद पहला चुनाव लड़ा
इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद सहानुभूति लहर में राजे ने अपने माता के आदेश पर चुनाव लड़ा और हार स्वीकार की। - राजमाता का कठिन संघर्ष
विजयाराजे सिंधिया दिन में 28 दिन दौरे पर रहती थीं। सुबह 3 बजे पूजा और फिर गांव-गांव दौरा। - पद की लालसा का अभाव
उस दौर में कोई पद के लिए लालची नहीं था। अटल जी और आडवाणी जी ने राजमाता को अध्यक्ष बनाने की इच्छा जताई थी, लेकिन उन्होंने गुरु की आज्ञा न मिलने पर मना कर दिया। - चुनाव जीतना नहीं, दिल जीतना लक्ष्य
भाजपा हमेशा लोगों का दिल जीतने की कोशिश करती रही है, केवल चुनाव जीतना मकसद नहीं। - पीएम मोदी का वैश्विक प्रभाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया में ‘अखंड ज्योत’ की तरह उजास फैलाया। भारत सुरक्षित और मजबूत है। - शून्य से शिखर तक का सफर
राजे ने पार्टी के उन सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को नमन किया जिन्होंने बलिदान देकर BJP को शिखर तक पहुंचाया।
संगठन की मजबूत जड़ों पर जोर
वसुंधरा राजे ने कहा कि पार्टी तभी मजबूत रहेगी जब उसके कार्यकर्ता संस्कारित और निष्ठावान हों। दलबदलुओं और असली कार्यकर्ताओं के सम्मान पर उनकी टिप्पणी राजस्थान की वर्तमान राजनीति से जोड़कर देखी जा रही है।
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