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शहर की सफाई के लिए अब मेयर, पार्षद और वार्ड सदस्य भी होंगे जिम्मेदार

शहर में कचरा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने नगर निगम से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने कहा है कि अगली सुनवाई से पहले सभी वार्डों में कचरा उठाने की स्थिति का पूरा विवरण तालिका के रूप में पेश किया जाए।

जनप्रतिनिधियों की भी तय होगी जिम्मेदारी

सुनवाई के दौरान अमिकस क्यूरी एस.के. श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट के 19 फरवरी 2026 के आदेश का हवाला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम-2026 को लागू करने की जिम्मेदारी केवल नगर निगम की नहीं होगी। अब इसमें कलेक्टर, प्रशासनिक अधिकारी, मेयर, पार्षद, अध्यक्ष और वार्ड सदस्य जैसे जनप्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी

इन सभी को कचरे को स्रोत स्तर पर अलग-अलग करने और सफाई व्यवस्था को सही ढंग से लागू करने में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। नियमों का पालन नहीं करने पर आपराधिक कार्रवाई का भी प्रावधान है।

जनहित याचिका के बाद हुआ मामला

यह मामला केदारपुर लैंडफिल साइट पर कचरे के ढेर और शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर दायर एक जनहित याचिका के बाद सामने आया। यह याचिका सरताज सिंह ने हाईकोर्ट में दायर की थी।

66 वार्डों में सफाई की स्थिति

नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि शहर के 66 वार्डों में से 36 वार्डों में कचरा संग्रहण की व्यवस्था पूरी तरह लागू है। जहां ट्रिपर वाहन आसानी से पहुंच सकते हैं, वहां लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र से रोज कचरा उठाया जा रहा है। संकरी गलियों वाले करीब 10 प्रतिशत क्षेत्रों से दो दिन में एक बार कचरा उठाया जाता है

कुछ जगहों पर ट्रिपर वाहन की जगह हाथगाड़ियों से कचरा संग्रहण किया जा रहा है। बाकी 30 वार्डों में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जा रही है, लेकिन उनका पूरा डेटा अभी उपलब्ध नहीं है।

कोर्ट ने मांगा पूरा विवरण

हाईकोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिया है कि सभी 66 वार्डों में कचरा संग्रहण की मात्रा और कवरेज का पूरा विवरण तालिका के रूप में पेश किया जाए।

स्वच्छता फंड में बढ़ी राशि

नगर निगम ने यह भी बताया कि स्वच्छता से जुड़ी गतिविधियों के लिए एक विशेष खाता खोला गया है। पहले इसमें करीब 3.05 लाख रुपये थे, जो अब बढ़कर लगभग 15.90 लाख रुपये हो गए हैं। इससे यह भी साफ है कि नागरिक इस अभियान में सहयोग कर रहे हैं और नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना भी लगाया जा रहा है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश सभी अधिकारियों और विभागों पर लागू होते हैं। इसलिए सभी विभागों को अधिक सतर्क होकर कचरा प्रबंधन और अपशिष्ट प्रसंस्करण की व्यवस्था को बेहतर बनाना होगा

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