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शांगरी-ला डायलॉग 2025: क्यों अहम है यह सम्मेलन, जहां शामिल होंगे भारत के CDS जनरल अनिल चौहान

नई दिल्ली/सिंगापुर: भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान 2025 के शांगरी-ला डायलॉग में हिस्सा लेने के लिए सिंगापुर पहुंच चुके हैं। यह सम्मेलन न सिर्फ भारत के लिए, बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मंच के जरिए भारत एक बार फिर वैश्विक रणनीतिक विमर्श में अपनी सक्रिय भूमिका दर्ज कराने जा रहा है।


क्या है शांगरी-ला डायलॉग और क्यों है यह इतना अहम?

शांगरी-ला डायलॉग एक वार्षिक रक्षा सम्मेलन है, जिसका आयोजन International Institute for Strategic Studies (IISS) द्वारा सिंगापुर में किया जाता है। इस मंच की शुरुआत 2002 में हुई थी और इसका नाम सिंगापुर के प्रसिद्ध शांगरी-ला होटल के नाम पर रखा गया है, जहां हर साल यह सम्मेलन आयोजित होता है। “शांगरी-ला” मूल रूप से एक काल्पनिक शांतिपूर्ण स्थान को दर्शाता है — यह सम्मेलन भी उसी शांति और सामरिक संतुलन को लक्ष्य मानता है।


सम्मेलन में क्या होगा खास?

इस तीन दिवसीय सम्मेलन में 40 से अधिक देशों के रक्षा मंत्री, सैन्य प्रमुख, रणनीतिक विश्लेषक और नीति निर्माता हिस्सा लेंगे। ये सभी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा संकट, साइबर खतरे, ताइवान स्ट्रेट में तनाव, दक्षिण चीन सागर विवाद, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श करेंगे।


भारत की रणनीतिक उपस्थिति क्यों है महत्वपूर्ण?

हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान को सैन्य मोर्चे पर जवाब देने के बाद, भारत अब कूटनीतिक स्तर पर अपनी स्थिति और मजबूत कर रहा है। शांगरी-ला डायलॉग 2025 में CDS चौहान की भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत न सिर्फ क्षेत्रीय स्थिरता के पक्ष में है, बल्कि वह वैश्विक मंचों पर भी निर्णायक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।


CDS अनिल चौहान की प्रमुख बैठकें

जनरल चौहान सम्मेलन के दौरान अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, इंडोनेशिया, सिंगापुर जैसे देशों के सैन्य अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं करेंगे। इसके अलावा वह शोधकर्ताओं, थिंक टैंकों और अकादमिक विशेषज्ञों को भी संबोधित करेंगे, जिससे भारत की रणनीतिक सोच और सुरक्षा प्राथमिकताओं की वैश्विक समझ को बल मिलेगा।


शांति, संवाद और संतुलन का मंच

शांगरी-ला डायलॉग उन कुछ मंचों में से एक है जहां वैचारिक टकराव के बजाय संवाद को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे समय में जब दुनिया यूक्रेन युद्ध, चीन की आक्रामकता और आर्थिक-सामरिक प्रतिस्पर्धा से जूझ रही है, यह मंच आपसी विश्वास निर्माण और तनाव प्रबंधन के लिए अत्यंत प्रासंगिक बन गया है।

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