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शिक्षा विभाग में छंटनी मामले पर ट्रंप प्रशासन की सुप्रीम कोर्ट में अपील, आपातकालीन स्थगन की मांग

वॉशिंगटन, डीसी: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी को लेकर निचली अदालत द्वारा दिए गए पुनर्बहाली आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। ट्रंप प्रशासन ने आपातकालीन स्थगन (emergency stay) की मांग करते हुए कहा कि निचली अदालत का फैसला कार्यपालिका के अधिकारों में अनावश्यक हस्तक्षेप है।

क्या है मामला?

शिक्षा विभाग से करीब 1,400 कर्मचारियों को हटाया गया था, जो ट्रंप प्रशासन की उस विवादास्पद योजना का हिस्सा था जिसके तहत विभाग के आकार और कार्यक्षेत्र को सीमित करने की नीति अपनाई गई थी। इस फैसले को बोस्टन के फेडरल डिस्ट्रिक्ट जज मयोंग जॉन ने पलटते हुए इन कर्मचारियों की तत्काल बहाली का आदेश दिया था। साथ ही उन्होंने विभाग को सीमित करने की योजना पर भी रोक लगा दी थी

निचली अदालत के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की शरण

6 जून को अमेरिका के सॉलिसिटर जनरल डी. जॉन सॉयर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए तर्क दिया कि यह फैसला कार्यपालिका की नीतिगत स्वायत्तता को बाधित करता है। उनका कहना था कि यह अदालत द्वारा कार्यपालिका की नीतियों को बदलने जैसा है, जो कि संविधान की भावना के खिलाफ है।

फर्स्ट सर्किट कोर्ट ने नहीं दी राहत

इससे पहले, फर्स्ट यूएस सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जिससे ट्रंप प्रशासन को सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। प्रशासन ने अपने तर्क में कहा है कि छंटनी पूरी तरह वैधानिक और प्रशासनिक पुनर्गठन का हिस्सा थी।

जज जॉन की चेतावनी

निचली अदालत के जज ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि इतने बड़े पैमाने पर की गई छंटनी से विभाग की कार्यप्रणाली गंभीर रूप से बाधित होगी और इससे उसके कानूनी दायित्वों को निभाने की क्षमता पर भी असर पड़ेगा।

प्रशासन का पक्ष

ट्रंप प्रशासन की ओर से कहा गया है कि यह कदम शिक्षा विभाग को अधिक चुस्त और विकेन्द्रित बनाने के उद्देश्य से उठाया गया था, ताकि कई प्रशासनिक कार्य राज्यों को सौंपे जा सकें। प्रशासन का यह भी दावा है कि पूरी प्रक्रिया संवैधानिक और कानूनी ढांचे के अंतर्गत अपनाई गई थी।


अब आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर जल्द सुनवाई होने की उम्मीद है। अगर कोर्ट ट्रंप प्रशासन को राहत देता है, तो यह निर्णय कार्यपालिका के अधिकारों और न्यायपालिका की सीमाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

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