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श्मशान से उतारे कपड़ों का बाजार में सौदा? ‘कफन’ की साड़ियों का नेटवर्क अहमदाबाद तक फैला होने का दावा
अहमदाबाद। गुजरात से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां दावा किया जा रहा है कि श्मशान घाटों में मृतकों से उतारे गए कपड़ों को साफ कर बाजार में बेचा जा रहा है। आरोप है कि इन कपड़ों में विशेष रूप से साड़ियां और अन्य वस्त्र शामिल हैं, जिन्हें बाद में सामान्य कपड़ों की तरह बेच दिया जाता है। सबसे गंभीर बात यह है कि कुछ लोग अनजाने में इन्हीं कपड़ों को शादी-ब्याह, पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में पहन रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, यह नेटवर्क सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका कनेक्शन अहमदाबाद तक होने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि श्मशान से कपड़े इकट्ठा करने के बाद उन्हें धोया, प्रेस किया और नए जैसा दिखाकर बाजार में भेजा जाता है। इसके बाद कम दामों में इन कपड़ों की बिक्री की जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह का कारोबार न केवल धार्मिक और सामाजिक भावनाओं के खिलाफ है, बल्कि स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिहाज से भी बेहद गंभीर मामला है। मृतकों के कपड़ों को बिना स्पष्ट जानकारी दिए बेचने से आम लोगों के साथ धोखाधड़ी भी मानी जा सकती है।
कई लोगों ने मांग की है कि प्रशासन इस मामले की गहराई से जांच करे और ऐसे नेटवर्क से जुड़े लोगों पर सख्त कार्रवाई हो। लोगों का कहना है कि अगर कपड़ों का ऐसा कारोबार सच में चल रहा है, तो यह समाज के विश्वास और धार्मिक परंपराओं के साथ बड़ा खिलवाड़ है।
वहीं, पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें किन लोगों की भूमिका है। फिलहाल इस मामले ने बाजारों में बिकने वाले पुराने कपड़ों और सस्ती साड़ियों को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सेकेंड हैंड कपड़ों के व्यापार में पारदर्शिता जरूरी है। ग्राहक को यह जानकारी होनी चाहिए कि कपड़ा कहां से आया है और उसे किस प्रक्रिया से साफ किया गया है। बिना जानकारी दिए ऐसे कपड़े बेचना नैतिक और कानूनी दोनों स्तर पर सवाल खड़े करता है।
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