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75 साल बाद फिर चर्चा में सोमनाथ मंदिर: गांधी सरकारी पैसे से निर्माण के खिलाफ थे, नेहरू ने उद्घाटन से बनाई थी दूरी
आज देश के सबसे ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों में शामिल Somnath Temple एक बार फिर सुर्खियों में है। मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री Narendra Modi आज सोमनाथ पहुंचेंगे। लेकिन इस मंदिर का इतिहास सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि आजादी के बाद की राजनीति और विचारधारा से भी जुड़ा रहा है।
आजादी के बाद जब सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की बात उठी, तब महात्मा Mahatma Gandhi ने साफ कहा था कि मंदिर का निर्माण सरकारी खजाने से नहीं होना चाहिए। गांधी चाहते थे कि इसका निर्माण जनता के सहयोग और दान से हो, ताकि धर्म और सरकार के बीच संतुलन बना रहे।
वहीं देश के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru ने भी मंदिर उद्घाटन समारोह से दूरी बना ली थी। माना जाता है कि नेहरू धर्मनिरपेक्ष छवि को लेकर बेहद सतर्क थे और नहीं चाहते थे कि सरकार किसी धार्मिक आयोजन से सीधे जुड़ी दिखे।
हालांकि उस समय के राष्ट्रपति Rajendra Prasad उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे। उनके इस फैसले पर उस दौर में बड़ी राजनीतिक बहस भी छिड़ गई थी।
अब 75 साल बाद प्रधानमंत्री मोदी का सोमनाथ दौरा एक बार फिर इतिहास, राजनीति और आस्था के उसी संगम को चर्चा में ले आया है। देशभर की नजरें आज गुजरात के इस ऐतिहासिक मंदिर पर टिकी हुई हैं।
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